
प्रयागराज।हिन्दी साहित्य परिषद् के तत्वावधान में प्रयाग स्थित बायोवेद शोध संस्थान के सभागार में आज नवसंवत्सर के उपलक्ष्य में एक विद्वत्संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एम पी दुबे ने किया।
समारोह में साहित्यकार, समाज सेवी डा दयाराम विश्वकर्मा पूर्व जिला विकास अधिकारी तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के शिक्षा संकाय के आचार्य प्रो प्रेम शंकर राम को श्रीफल, शाल एवं सम्मान पत्र प्रदान कर उनका सारस्वत सम्मान किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए पूर्व कुलपति प्रोफेसर एम पी दूबे ने कहा कि सनातन संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है।विद्वज्जनों का सम्मान इस संस्कृति का आवश्यक अंग है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति में संयुक्त परिवार की अवधारणा को व्याख्यायित किया। श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत परिषद एवं हिन्दी साहित्य परिषद के अध्यक्ष डा रामजी मिश्र ने कहा कि पुराणों के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण किया था इसलिए इस दिन से हि नवसंवत्सर मनाया जाता है।
उन्हौंने स्वरचित श्लोक से लोगों को नवसंवत्सर की बधाई दी। सम्मान से अभिभूत डा दयाराम विश्वकर्मा एवं प्रौ प्रेमशंकर राम ने कहा कि यह सम्मान वस्तुत: हमारे कृतित्व का सम्मान है। संगोष्ठी में डा बी के द्विवेदी डा अशोक कुमार पाण्डेय, माध्यम के सचिव विनय श्रीवास्तव डा अंशुल के बी सक्सैना ,के पी शुक्ल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह का संचालन डाक्टर पीयूष मिश्र ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर रवि प्रकाश मिश्र ने किया।
