प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम कुरहुआ में किया गया, कोल्ड फागिंग का ट्रायल

 

वाराणसी। संचारी रोगों की रोकथाम के मद्देनजर मच्छरों पर नियंत्रण हेतु मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु नागपाल के निर्देशन में कोल्ड फागिंग तकनीक को समस्त ग्राम पंचायतों और वार्डों में प्रभावी बनाने का कार्य किया जा रहा है। इस क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने कोल्ड फागिंग का ट्रायल बुधवार को ब्लाक काशी विद्यापीठ के प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम कुरहुआ में सफलतापूर्वक किया। पंचायत भवन और इसके आस-पास के रिहायसी क्षेत्रों में एडीओ पंचायत एवं पंचायत सचिव की उपस्थिति में कोल्ड फागिंग का ट्रायल किया गया। विशेषकर डेंगू संचरण काल में जुलाई से नवंबर तक केस बेस्ड एक्टिविटी में भी रोगी के घर के आस-पास 45 घरों में इसका प्रयोग किया जाएगा। आने वाले समय में इस नव तकनीक को कुछ संवेदनशील ग्राम पंचायतों में भी प्रथम स्तर पर प्रयोग किया जाएगा। जिससे मच्छरजनित बीमारियों पर लगाम लगेगी| इसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने दी।

सीएमओ ने बताया कि इस तकनीक में जहाँ थर्मल फागिंग में डीजल का प्रयोग कीटनाशक के साथ धुआँ बनाने के लिए किया जाता है, वहीँ कोल्ड फागिंग में कीटनाशक का प्रयोग पानी के साथ किया जाता है। कोल्ड फागिंग में धुएँ की जगह मिस्ट बनते हैं। इस नवोन्मेष से मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण व बचाव किया जा सकेगा। जिला मलेरिया अधिकारी शरत चंद पाण्डेय ने बताया कि मच्छरों पर नियंत्रण और परंपरागत डीजल आधारित फॉगिंग के द्वारा वातावरणीय प्रदूषण के दृष्टिगत जल आधारित कोल्ड फॉगिंग की अवधारणा स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई है। इसके प्रयोग के लिए डेल्टामेथ्रिन 2 फीसदी EW (इमर्जन वाटर) का प्रयोग पानी में मिलाकर किया जाता है| आने वाले समय में इसका प्रयोग चिकित्सालयों में भी किया जायेगा। संक्रमण काल में हाट स्पाट क्षेत्रों में डेंगू, केस के सापेक्ष निरोधात्मक कार्यवाही में भी इसका प्रयोग किया जाएगा। कुछ संवेदनशील ग्राम पंचायतों और वार्डो में भी इसका प्रयोग किया जाएगा। धुआँ रहित होने से जहाँ प्रदूषण नहीं होगा, वहीँ फागिंग के मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।

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