आयोजन के पांचवें दिन अरण्यकांड का समापन ऋषि मुनियों के नाम समर्पित रहा यज्ञ 

 

वाराणसी। मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र में मनाई जा रहे राम पट्टाभिषेक महोत्सव में मंगलवार को श्रीराम प्रभु के संत वत्सल स्वरूप की वंदना की गई। किष्किंधा एवं अरण्यकांड के समवेत परायण के साथ आचार्य ने उन सभी ऋषि मुनियों के नाम से हब्य दिया जो वन प्रयाग प्रवास के दौरान जिन पर श्रीराम प्रभु की कृपा बरसी। सैकड़ो वर्षों की तपस्या के बाद जिन्हें राघव का दर्शन प्राप्त हुआ।

यज्ञ के आचार्य उलीमीरि सोमायाजुलू ने बताया कि वस्तुत भगवान नारायण भक्तों को अभय एवं दुष्टो नाश के लिए ही धरा पर अवतार लेते हैं। श्री राम प्रभु का वनवास भी विधि का ही लिखा था, प्रभु का वनवास ही इस निमित्त था कि सांसारिकता त्याग कर लोक कल्याण के लिए तपस्यारत मुनि जनों को अभय प्राप्त हो और राक्षसों का दमन हो। अपनी यात्रा में प्रभु ने यह दोनों मंतव्य पूरे किए महर्षि यत्री, सती अनुसुइया, महर्षि सरभंग के आश्रम तक जाकर उन्हें अभय दिया। शबरी, जटायू, कबंध जैसे भक्तों व शापितों को उत्तम लोक प्रदान किया। आचार्य ने बताया कि किष्किंधा एवं अरण्यकांड के सभी सदपात्रो को आज यज्ञ का विशेष हब्य प्रदान किया गया।

गुरुवार को महोत्सव के सारे अनुष्ठान सुंदरकांड के प्रसंग के अनुरूप संपादित किए जाएंगे। मुख्य यजमान एवं आंध्र आश्रम के प्रबंधक ट्रस्टी बी वी सुंदर शास्त्री ने आज यज्ञ में सभी ऋषि मुनियों को भावांजलि अर्पित की। संयोजन आश्रम के प्रबंधक बीवी सीताराम ने किया।

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