
वाराणसी। हिंदी रंगमंच ने हमेशा से भारतीय समाज को न केवल मनोरंजन प्रदान किया है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय रंगमंच के इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण दिन है “हिंदी रंगमंच दिवस“। इस दिन हम उस ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हैं, जो अपने शुरुआती दिनों से लेकर आज तक तय की है। यह कहना है मिसेज एशिया विजयता सचदेवा का जो केवी जनकल्याण ट्रस्ट द्वारा गुरुवार को पांडेपुर शाखा में हिंदी रंगमंच दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थी। उन्होंने कहा कि देश में आजादी से पूर्व जब फिल्मों का आविष्कार नहीं हुआ था, तब लोगों के मनोरंजन का साधन रंगमंच ही हुआ करता था। रंगमंच एक ऐसी कला है जो बिना किसी स्क्रीन के साक्षात मनोरंजन उपलब्ध कराता है। आज भले ही सिनेमा ने टीवी सीरियल और अब वेब सीरीज़ के रूप में अपना विस्तार कर लिया हो लेकिन अभिनय का आधार अभी भी रंगमंच को ही माना जाता है।
3 अप्रैल को प्रतिवर्ष हिन्दी रंगमंच दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1868 की शाम बनारस में पहली बार पंडित शीतला प्रसाद त्रिपाठी कृत हिन्दी नाटक ’जानकी मंगल’ का मंचन हुआ। त्रिपाठी ने शास्त्रीय संस्कृत नाटक, पारंपरिक रामलीला और यूरोपीय नाट्य तत्वों को मिलाकर ’जानकी मंगल’ तैयार किया था। जून 1967 में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का इतिहास में पहली बार इस नाटक के मंचन को प्रामाणिक तौर पर पुष्ट किया।
भारतेन्दु हरिश्चंद्र को हिन्दी रंगमंच का जनक माना जाता है। वे आधुनिक हिन्दी साहित्य के भी जनक हैं। हिंदी रंगमंच की स्थापना में काशी नरेश ईश्वरी नारायण सिंह की अहम भूमिका रही। उन्होंने ही अपने दरबारी कवि गणेश को नाटक लिखने को कहा था। गणेश ने जो नाटक लिखा वह पारंपरिक और छंदबद्ध था।
विजेता सचदेवा ने कहा कि लेकिन आज दुखद पहलू यह है कि लोगों के दिलों की गहराइयों तक स्पर्श करने वाली यह कला उपेक्षित हो रही है या यूं कहें दम तोड़ती दिख रही है।
आइए इस पवित्र दिन हम सभी संकल्प लें कि हिंदी रंगमंच को एक बार फिर शिखर पर पहुंचाएंगे।
इस मौके पर केवी जनकल्याण ट्रस्ट द्वारा किए गये कार्यों को विडियो के माध्यम से दर्शाया गया। साथ ही भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ के पूर्व छात्र एवं वरिष्ठ रंग कमी नवीन चंद्र ने अंधा युग का पाठ किया।
मुख्य अतिथि संस्कार भारती काशी महानगर के डॉक्टर रवि शर्मा ने हिंदी रंगमंच एवं भारतेंदु हरिश्चंद्र के विषय में विस्तृत जानकारी साझा की।
मुख्य अतिथि ने पांच दिवसीय कैमरा एक्टिव वर्कशाप हिस्सा लेने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र प्रदान किया साथ ही नेशनल अवार्ड से सम्मानित डायरेक्टर के साथ काम करने वाले भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान पुणे के छात्र संदीप यादव बनारस के जाने-माने रंगकर्मी लेखक उमेश भाटिया एवं मॉडर्न डिजिटल कंप्यूटर इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर आदित्य मिश्रा को सम्मानित किया।
