
वाराणसी। प्रेमचंद की कहानियां सामाजिक मनोविज्ञान की गहराई से पड़ताल करती हैं। मानवीय भावनाओं को बेहतरीन तरीके प्रस्तुत करती हैं। वे समाज में हो रही कुरीतियों, अंधविश्वास और असमानताओं के खिलाफ थे। उनके लेखन में सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के प्रति जागरूकता का संदेश मिलता है। यह बातें साहित्यकार डा.रामसुधार सिंह ने प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र की ओर से प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में सुनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ के 1511 दिन पूर्ण होने पर कही। प्रो.प्रो श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य के माध्यम से सामाजिक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रेमचंद की रचनाओं को पढ़ने के बाद समझ में आता है कि झूठ की उम्र लंबी नहीं होती है और कभी न कभी इसका खुलासा हो ही जाता है। प्रेमचंद की कहानी एक आंच की कसर का पाठ लेखिका डाॅ. मंजू प्रकाश ने किया। उनका सम्मान प्रो. श्रद्धानंद , डा राम सुधार सिंह, राजीव गोंड, डा.संजय श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर मनोज श्रीवास्तव, माधव कृष्ण राव, आलोक शिवाजी, मनोहर, रोहित गुप्ता, वैभव कुमार पाण्डेय, संजय श्रीवास्तव, राहुल यादव, देव बाबू,आदि थे। संचालन आयुषी दूबे, स्वागत मनोज विश्वकर्मा, धन्यवाद ज्ञापन डा. राजेश श्रीवास्तव ने किया।
