
वाराणसी। राजकीय जिला पुस्तकालय अर्दली बाजार में गुरुवार को विद्याश्री न्यास और मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही के तत्वाधान में डॉ शुभा श्रीवास्तव की हिंदी साहित्य की आधी आबादी पूरा इतिहास तथा शिवरानी देवी रचनावली (संपादक शुभा श्रीवास्तव, राजीव गोंड) दो पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। स्वागत करते हुए दया निधि मिश्रा ने कहा कि स्त्री विमर्श आज का सबसे ज्वलंत मुद्दा है। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ नीरजा माधव ने कहा कि पुस्तक में स्त्रियां और कुछ विमर्श हैं। इतिहास लेखन आसान काम भी है और जोखिम भरा काम भी है इतिहास लिखना पवित्र और ईमानदारी का काम है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि हिंदी साहित्य की आधी आबादी पूरा इतिहास पुस्तक आदिकाल से लेकर वर्तमान कालखंड तक का मुकम्मल कार्य प्रदर्शित करती है। शुभा लंबे समय से हिंदी साहित्य की उपेक्षित और अनाम रह चुकी रचनाकारों पर कार्य कर रही हैं। इस शोध का परिणाम है हिंदी साहित्य की आधी आबादी पूरा इतिहास। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मुक्ता ने कहा कि हिंदी साहित्य की आधी आबादी पूरा इतिहास पुस्तक गहरी शोध का परिणाम है। इसमें आदिकालीन स्त्री के सामाजिक परिवेश से उपजे अंतर्द्वंद को बखूबी रेखांकित किया गया है। मध्यकाल में स्त्री को देखकर भीतर समेटने के प्रयासों के प्रति स्पष्ट प्रतिरोध दिखाई देती है। बाराबंकी की डॉ. अलका तिवारी ने कहा कि इतिहास लेखन और विशेषकर स्त्री लेखन का इतिहास लिखना जोखिम से भरा काम है,मगर इस कार्य को शुभा जी ने बहुत मेहनत से किया है। संचालन कवींद्र नारायण श्रीवास्तव, धन्यवाद ज्ञापन शुभा श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह, अत्री भारद्वाज,अशोक सिंह, श्रद्धानंद, नरेंद्र मिश्र,आभा, शालिनी, संगीता श्रीवास्तव ,मंजरी पांडेय, शशिकला पांडेय, पद्मजा अस्थाना, सिद्धनाथ शर्मा, शालिनी तिवारी, ममता यादव, शरद कुशवाहा, आशीष कुमार , श्रद्धा , रश्मि, अर्चना , अदिति, कंचन लता चतुर्वेदी, मनोज आदि थे।
