वाराणसी। प्रेमचंद की कहानियां यथार्थ का आग्रह जड़ता और यथास्थिति में बदलाव के पक्ष में होती है। यह बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र की ओर से प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में आयोजित सुनों मैं प्रेमचंद कहानी पाठ 1532 दिवस पर कहीं। उन्होंने कहा कि यह सत्य है कि गतिशील यथार्थ की सही समझ जब हो जाती है तो वह यथार्थ की अगली अवस्था की कल्पना भी कर सकता है। प्रेमचंद की कहानी सच्चाई का उपहार का पाठ वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डा. भारतीय बसंत कुमार ने किया। सम्मान डा. राम सुधार सिंह, ने किया।सोच-विचार पत्रिका के संपादक नरेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि जीवन में प्रेमचंद ने जो देखा और महसूस किया उसे साहित्य में वैसा ही लिखा है। उन्होंने रोमांस और अध्यात्म को अपनी कहानी में हावी नहीं होने दिया, सत्य चित्रण के कारण ही उनका चित्रण प्रभावशाली बन पड़ा है। इस अवसर प्रो. श्रद्धानंद, नरेंद्र मिश्र, राजीव गोंड, संजय श्रीवास्तव आलोक शिवाजी, मनोहर लाल, रोहित गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, राहुल यादव, देव बाबू, पंकज सिंह, विदेश सिंह, हिमांशु, व्योमेश चित्रवंश, डा जगदीश, डा गंगाधर राय, सुर्यभान सिंह, कृष्णा पाण्डेय, रामाशीष गोंड, रामविलास गोंड, रितिक सिंह थे। संचालन डा. मंजरी पाण्डेय, स्वागत मनोज विश्वकर्मा व धन्यवाद ज्ञापन आलोक शिवाजी ने किया।

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