
वाराणसी। प्रेमचंद की कहानियां भाव के क्षेत्र में प्रेमचन्द की आरंभिक कहानियाँ भावना प्रधान और आदर्शवादी हैं। यह बातें प्रो. श्रद्धानंद ने प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में कहीं। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र की ओर से आयोजित सुनों मैं प्रेमचंद की कहानी बोध का पाठ आलोचक व साहित्यकार डा. महेंद्र प्रताप सिंह ने किया। सम्मान राम सुधार सिंह, प्रो. श्रद्धानंद, अशोक सिंह, कंचन सिंह परिहार, निदेशक राजीव गोंड एवं संजय आलोक शिवाजी ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डा रामसुधार सिंह का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। साहित्यकारों व साहित्यप्रेमियों ने माल्यार्पण कर सम्मान किया। डा. राम सुधार ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कहानी की बात उठती है तो प्रेमचन्द का नाम निश्चय ही आदर के साथ लिया जाता है। प्रेमचन्द ने जो भोगा है, जो देखा है उसे निष्कपटता के साथ शब्दों में साकार कर दिया है। इस अवसर आलोक शिवाजी, मनोहर, रोहित गुप्ता, अशोक सिंह, कुमार महेंद्र, विनोद वर्मा, शुभा श्रीवास्तव, बुद्ध नाथ,आलोक अस्थाना, राहुल यादव, देव बाबू, पंकज सिंह, विदेश सिंह, हिमांशु, व्योमेश चित्रांश, डाक्टर जगदीश, सुर्यभान सिंह,आयुषी दूबे, मनोज विश्वकर्मा,आलोक शिवाजी थे।
