
वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के मुख्य भवन में बुधवार को दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र द्वारा नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर आद्यशक्ति माँ दुर्गा के पूजन-अर्चन का दिव्य, भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में श्रद्धा एवं भक्ति-भाव के साथ सम्पन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, धूप-दीप की पावन सुवास तथा छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता से सम्पूर्ण परिसर आध्यात्मिक चेतना एवं सांस्कृतिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि भारतीय नव संवत्सर केवल काल-गणना का प्रारम्भ नहीं, अपितु सांस्कृतिक पुनर्जागरण, आत्मिक परिष्कार एवं नव-संकल्प का शुभ प्रतीक है। मां दुर्गा की आराधना मानव को शक्ति, धैर्य, मर्यादा एवं धर्म निष्ठा के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र के निदेशक प्रो. विधु द्विवेदी के कुशल मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर सम्पन्न वैदिक पूजन, स्तोत्र-पाठ एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया तथा नव संवत्सर के आगमन का मंगल संदेश प्रसारित किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार की गरिमामयी सहभागिता उल्लेखनीय रही।
पूजन समारोह में देवी के भक्तिमय संगीत से गुंजायमान रहा।
इस अवसर पर कुलसचिव श्री राकेश कुमार, प्रो. रामपूजन पाण्डेय, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. राजनाथ, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो विद्या कुमारी चंद्रा, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, रीना प्रसाद, नीलू पटेल, शशि पांडेय, मृदुला मिश्रा सहित आचार्यगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे तथा सभी ने श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन में सहभागिता कर आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक समृद्ध किया।
अंततः समस्त जगत के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं शांति की मंगलकामनाओं के साथ कार्यक्रम का विधिवत् समापन हुआ।
