
राष्ट्र रक्षा के लिये कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने विश्वविद्यालय परिवार को दिया संदेश—-
प्रिय विश्वविद्यालयीय परिवार के सदस्यगण, शिक्षकवृन्द, कर्मचारीगण, छात्र-छात्रायें एवं समस्त सम्बद्ध महाविद्यालयों के पदाधिकारीगण,
*सप्रेम वन्दन*।
वर्तमान में भारत एक अत्यन्त संवेदनशील एवं निर्णायक परिस्थिति से गुजर रहा है। पाकिस्तान द्वारा उत्पन्न सैन्य तनाव एवं राष्ट्रीय सुरक्षा पर संकट की इस घड़ी में सम्पूर्ण देश एकजुट होकर राष्ट्र की रक्षा, अखण्डता और सम्मान हेतु कटिबद्ध है। ऐसे समय में, हम सबका – विशेषकर शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों का *यह परम उत्तरदायित्व बनता है कि हम न केवल नैतिक और मानसिक समर्थन प्रदान करें, बल्कि सक्रिय राष्ट्रसेवा के लिए अपने कर्म, विचार और संगठनात्मक चेतना का पूर्ण समर्पण करें।*
*सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय*,जो कि भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्म, नीति, संस्कृति और राष्ट्रनिष्ठा का प्राचीनतम प्रतीक है, सदैव से राष्ट्रधर्म के लिए अग्रणी रहा है। आज पुनः समय आ गया है कि हम अपने संस्थान के गौरव, ज्ञान और जनशक्ति को राष्ट्रहित में समर्पित करें।
*इस सन्दर्भ में आप सभी से अपेक्षित योगदान इस प्रकार है* :
1. *एकात्मता एवं वीर सैनिकों के समर्थन हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित करें* :
संस्कृत महाविद्यालयों में ‘भारत विजय यज्ञ’, दीप प्रज्ज्वलन, सैनिक सम्मान सभाएं, वंदेमातरम् संकीर्तन आदि का आयोजन करें।
• विद्यार्थियों को राष्ट्रभक्ति पर आधारित श्लोकों, गीतों, भाषणों के माध्यम से सशक्त प्रेरणा दें।
2. *सोशल मीडिया और सार्वजनिक संवाद में राष्ट्रहित का समर्थन करें* :
• ‘We Stand with Indian Armed Forces’ जैसे अभियान विश्वविद्यालय/महाविद्यालय स्तर पर प्रारंभ करें।
• देशविरोधी अफवाहों और मनोबल गिराने वाले प्रचारों का तथ्यात्मक खंडन करें।
3. *आपदा सहयोग और सैनिक परिवार सहायता हेतु विद्यार्थियों को प्रेरित करें* :
• राहत सामग्री, रक्तदान, आर्थिक सहायता आदि के लिए स्वैच्छिक शिविर आयोजित करें।
• NSS, NCC, स्वयंसेवकों को नागरिक सुरक्षा, सतर्कता व सेवा भाव में प्रशिक्षित करें।
4. *शास्त्रों के माध्यम से राष्ट्रधर्म का प्रसार करें* :
• गीता, रामायण, महाभारत, नीति शास्त्र आदि से राष्ट्ररक्षा, धर्मयुद्ध और कर्मयोग से सम्बंधित श्लोकों का विद्यार्थियों में अध्ययन एवं प्रसार कराएँ।
*”धर्मो रक्षति रक्षितः*” — की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालय एक धर्म-संरक्षक राष्ट्रदूत की भूमिका निभाए।
5. *शांति, संयम और देशभक्ति का सामूहिक सन्देश दें* :
सभी महाविद्यालय 10 मिनट के विशेष राष्ट्र प्रार्थना सत्र का आयोजन प्रतिदिन करें।
*‘राष्ट्र सर्वोपरि है*’ यह सन्देश हर विद्यार्थी, शिक्षक एवं कर्मचारी के आचरण में प्रतिबिम्बित हो।
*सेवा समर्पण का सन्देश* :
प्रियजनों, युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़ा जाता, वह मन, मस्तिष्क और मनोबल में भी लड़ा जाता है। आइए हम सभी सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य इस समय को सेवा, सजगता और समर्पण के समय में बदल दें।
हमारा ज्ञान राष्ट्र के लिए, हमारी संस्कृति मातृभूमि के लिएऔर हमारी चेतना सशक्त भारत के लिये।
*राष्ट्र उत्थान के लिये यज्ञ*–
ज्ञातव्य हो कि विश्वविद्यालय में आज राष्ट्र की कुशलता एवं श्रेष्ठता पूर्वक विजय प्राप्त करने हेतु पूजन/ हवन कराया जा रहा है।
*जय हिन्द। वन्दे मातरम्।*
*प्रो बिहारी लाल शर्मा*
कुलपति
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय,
वाराणसी।
