वाराणसी।राजभवन के निर्देश पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के सांख्य योग तंत्रागम विभाग में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दृष्टिगत 10 सूत्रीय बिंदुओं पर आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को प्रथम बिंदु का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रोफेसर सुधाकर मिश्र जी ने भारतीय परंपरा के अनुसार योग के सार्वभौमिक महत्व को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक और आत्मिक विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। प्रोफेसर मिश्र ने मनोयोग से भौतिक एवं मानसिक विकास के संदर्भ में भी योग की भूमिका को परिभाषित करते हुए कहा कि योग के माध्यम से हम अपने जीवन को अधिक स्वस्थ, सुखी और संतुलित बना सकते हैं।

विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष एवं उद्भट विद्वान प्रोफेसर हरिशंकर पांडेय जी ने चित्त वृत्ति निरोध पूर्वक योगत्व को परिभाषित करते हुए योग के द्वारा विकास के शिखर को प्राप्त करने का मूल मंत्र बताया।

उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से हम अपने चित्त को नियंत्रित कर सकते हैं और अपने जीवन को अधिक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।

विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी एवं छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर शैलेश मिश्र ने अध्यक्षता करते हुये ऋषि परंपरा से जीवन के विकास के क्रम में योग की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए कहा कि योग एक ऐसी विधा है जो हमें प्रकृति के साथ जुड़ने और उसकी महत्ता को समझने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से हम अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण बना सकते हैं।

कार्यक्रम के संयोजक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम के समन्वयक एवं सांख्ययोग तंत्रागम विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राघवेंद्र जी दुबे ने स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन किया , प्रो सुधाकर मिश्र, प्रो हरिशंकर पांडेय, प्रो शैलेश मिश्र और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में डॉ चंद्रशेखर सिंह, डॉ ए लक्ष्मण राव शास्त्री, डॉ विवेक कुमार उपाध्याय, डॉ राजकुमार मिश्र और छात्र-छात्राएं जैसे निधि गुप्ता, ज्योति तिवारी, शर्मिष्ठा आर्या आदि उपस्थित थे। सभी ने कार्यक्रम की भव्यता और योग के महत्व को समझने का अवसर प्राप्त किया।

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