
विश्व एलोपैथी जगत में मेडिसिन और सर्जरी जैसा विषय श्रेष्ठतम विषय कोई नहीं, लेकिन रोग निदान में पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी ये दो विषय भी रोगी के रक्षार्थ कम नहीं है।
जहां तक पहचान का सवाल है कभी फोटो खींचने वाला चिकित्सक आज मेडिकल जगत में सर्वोच्च स्थान की प्राप्ति कर चुका है।
शहरी और गांव की जनता में अभी भी काफी फर्क है। जो कुशिक्षा के परिणाम से पीड़ित है। गांव या छोटे शहरों की जनता आज भी रेडियालाजिस्ट को टेक्नीशियन से ज्यादा महत्त्व नहीं देती।
जब कि आज अल्ट्रासाउण्ड ऐसी विधि है जो गर्भावस्था में सस्ती, रेडियेशन रहित, ऐसी पद्धति है जिसका उपयोग गर्भाधान के प्रारंभिक चार-पांच सप्ताह से लेकर से नौ माह, एक सप्ताह तक, यह ऐसी विधि है जिससे प्रसव पूर्व समस्याओं तक कर ज्ञान प्राप्त है। सरकारी तंत्र के अनुसार 11-14 सप्ताह तक कुछ ऐसी बीमारियों का ज्ञान अल्ट्रासाउंड से प्राप्त हो सकता है ।जिससे गर्भस्थ शिशु के प्रसव तक ध्यान देने की आवश्यकता प्रदान करता है। गर्भस्थ महिला का पूरे समय तक तीन बार अल्ट्रासाउंड व्दारा भ्रूण के ग्रोथ का अध्ययन किया जाता है।
पैदाइशी, जन्मजात, ब्लड ग्रुप विषमताओं के कारण भ्रूण में अन्यान्य विकृति उत्पन्न हो जाते है। जिन्हें तत्काल निकाल देने में ही भलाई है ऐसे भ्रूण समय पूर्ण होने पर यदि प्रसव को प्राप्त भी हो जायें तो ऐसी माताएं उनके जीवित रहने तक चिन्ताओं को झेलती है। ईलाज में अन्धाधुंध धन खर्च होता है फिर भी
सामान्य स्थिति को प्राप्त नहीं हो पाता है।
हाइड्राप्स फिटैलिस एक ऐसी बीमारी है जिसे जन्म देना अनुचित ही प्रतीत होता है जिसमें शरीर के ऊत्तक फैविटी में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। अल्ट्रासाउण्ड जांच में अकस्मात् यह रोग पकड़ आता है जिसके लिये रेडियोलाजिस्ट की दक्षता बड़ा ही योगदान करता है।
यह बीमारी रक्त ग्रुफ में आर एच विसंगति के कारण हो जाता है। यह ऐसी स्थिति जिसमे आर एच निगेटिव रक्त वाली मां अपने बच्चे की आर एच पाजिटिव रक्त कोशिकाओं के लिये एंटी बाडी बनाती है और ऐंटीबाडी प्लेसेंरा को पार कर जाती है।
यह बीमारी दो प्रकार के होते हैं (1)इम्यून हाइड्राप्स फिटैलिस (2) नान इम्यून हाइड्राफ्स फिटैलिस का होता है। दूसरा प्रकार आज 85% मरीजों में देखा जाता है। इसका उपयुक्त कारण और चिकित्सा आज तक अज्ञात है। अत: निदान के बाद गर्भ समापन ही ईलाज है।
कुछ इसी प्रकार के दो बच्चों का निदान 20-24 सप्ताह के मध्य डा ओ पी शर्मा ने अल्ट्रासाउण्ड से सामान्य रूप में करते हुए लगभग 9200 स्त्रियों के जांच के बीच कर पाये है और सामान्य विधि से गर्भ निस्तारण किया गया,और स्त्री सामान्य अवस्था को प्राप्त कर अपने घर वापस चली गई।
(लेखक डा ओ पी शर्मा)
