
कार्यक्रम का दूसरा दिन
वाराणसी। मंगलवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, बीएचयू, वाराणसी तथा अंतर विश्वविद्यालय योगिक विज्ञान केंद्र, बैंगलोर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स : योग फॉर माइंडफुलनेस एंड वेल बीइंग’ विषय पर छः दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत आदित्य कुमार जी के नेतृत्व में एक योग सत्र से हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास किया। इसके बाद, प्रो. रविशंकर शेनॉय, मुनियाल आयुर्वेद मेडिकल साइंसेज संस्थान, मणिपाल, कर्नाटक ने “तनाव मुक्ति और भावनात्मक संतुलन हेतु योग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आधुनिक जीवन में तनाव के कारणों को विस्तृत रूप से समझाया, और तनाव के दो प्रकारों- यूस्ट्रेस (सकारात्मक तनाव) और डिस्ट्रेस (नकारात्मक तनाव) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तनाव प्रबंधन में सही दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और इसके लिए योग में विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। दिन का समापन डॉ. शैलेन्द्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में ध्यान साधना सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने विभिन्न ध्यान तकनीकों का अभ्यास किया, जिससे उन्हें आंतरिक शांति एवं विश्राम का अनुभव हुआ। इस कार्यकम का संयोजन प्रो. अजय कुमार सिंह तथा सहसंयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी व डॉ. कुशाग्री सिंह द्वारा किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, वाराणसी व नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ‘यूज ऑफ रुब्रिक्स फॉर असेस्मेंट ऑफ प्रोजेक्ट्स, सेमिनार्स एंड इंडस्ट्रियल ट्रैनिंग्स’ विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आई.यू.सी.टी.ई. परिसर में किया जा रहा है। जिसके दूसरे दिन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च, भोपाल के प्रो. आर.के. कपूर ने शिक्षकों को पाठ्यक्रम के अधिगम परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि परिणाम-आधारित शिक्षा में स्पष्ट अधिगम परिणाम शिक्षण की गुणवत्ता को सुनिश्चित कर सकते हैं। वहीं, दूसरी वक्ता प्रो. अंजू रावले ने मूल्यांकन की मूल अवधारणाओं एवं विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए प्रभावी मूल्यांकन के लिए सैद्धांतिक स्पष्टता एवं उद्देश्यपरकता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन उपकरण के रूप में रूब्रिक्स की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका है जिसके उपयोग से मूल्यांकन अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और उद्देश्य आधारित हो सकता है।
इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार राज्य के विभिन्न जनपदों में स्थित राजकीय पालीटेक्निस के 38 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं । इस कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. अंजू रावले, प्रो. आशीष श्रीवास्तव व सह-समन्वयन डॉ. अनिल कुमार द्वारा किया जा रहा है ।
