कार्यक्रम का चौथा दिन 

वाराणसी । गुरुवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, बीएचयू, वाराणसी तथा अंतर विश्वविद्यालय योगिक विज्ञान केंद्र, बैंगलोर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स : योग फॉर माइंडफुलनेस एंड वेल बीइंग’ विषय पर छः दिवसीय कार्यक्रम के चौथे दिन की शुरुआत आदित्य कुमार जी के योग सत्र से हुई।

प्रोफेसर अजय कुमार सिंह, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, वाराणसी ने “डिजाइनिंग अ पर्सनल वेलनेस प्लान” विषय पर अपने विचार साझा किए और कहा कि आज की व्यस्ततम जीवनशैली में शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक संतुलन के लिए एक निजीकृत और स्थायी वेलनेस योजना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस योजना को विकसित करने के लिए छोटे-छोटे कदमों और आत्म-विश्लेषण की भूमिका को रेखांकित किया। इसके पश्चात, विपश्यना विषय पर केंद्रित एक विशेष सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें ध्यान की इस प्राचीन पद्धति के माध्यम से आत्मनिरीक्षण और मानसिक शांति प्राप्त करने के उपायों पर चर्चा की गई।

दिन का समापन स्वामी दयापूर्णानन्द जी द्वारा संचालित एक ध्यान सत्र से हुआ, जिसने प्रतिभागियों को गहन ध्यानाभ्यास का अनुभव प्रदान किया। यह सत्र न केवल शांति ं

का अनुभव था बल्कि शिक्षकों को अपने भीतर झाँकने और आत्मिक संतुलन प्राप्त करने की प्रेरणा भी बना।

इस कार्यकम का संयोजन प्रो. अजय कुमार सिंह तथा सहसंयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी व डॉ. कुशाग्री सिंह द्वारा किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, वाराणसी व नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ‘यूज ऑफ रुब्रिक्स फॉर असेस्मेंट ऑफ प्रोजेक्ट्स, सेमिनार्स एंड इंडस्ट्रियल ट्रैनिंग्स’ विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आई.यू.सी.टी.ई. परिसर में किया जा रहा है। जिसके चौथे दिन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च, भोपाल के प्रो. आर. के. कपूर ने “इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग” विषय पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें तकनीकी शिक्षा में उद्योग-जगत की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके साथ ही, प्रो. अंजू रावले ने प्रतिभागियों से औद्योगिक प्रशिक्षण के मूल्यांकन हेतु रूब्रिक बनवाया और उसका प्रस्तुतीकरण भी करवाया, जो उनके लिए एक व्यावहारिक अनुभव सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. अंजू रावले, प्रो. आशीष श्रीवास्तव व सह-समन्वयन डॉ. अनिल कुमार द्वारा किया जा रहा है।

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