
कार्यक्रम का पांचवां दिन
वाराणसी । शुक्रवार को अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, वाराणसी व नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में ‘यूज ऑफ रुब्रिक्स फॉर असेस्मेंट ऑफ प्रोजेक्ट्स, सेमिनार्स एंड इंडस्ट्रियल ट्रैनिंग्स’ विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन आई.यू.सी.टी.ई. परिसर में हुआ।
सम्पूर्ति सत्र का शुभारम्भ मंगलाचरण व मां सरस्वती तथा महामना मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम की आधिकारिक रिपोर्ट प्रो. अंजू रावले द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें समस्त सत्रों, चर्चाओं और गतिविधियों का व्यापक विवरण साझा किया गया।
इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू ने की। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप आउटकम आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया और मूल्यांकन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु रूब्रिक्स आधारित मूल्यांकन को शिक्षक प्रशिक्षण का अनिवार्य अंग बताया। इस कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. अंजू रावले, प्रो. आशीष श्रीवास्तव व सह-समन्वयन डॉ. अनिल कुमार द्वारा किया गया।
इसके अतिरिक्त, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र, बीएचयू, वाराणसी तथा अंतर विश्वविद्यालय योगिक विज्ञान केंद्र, बैंगलोर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स : योग फॉर माइंडफुलनेस एंड वेल बीइंग’ विषय पर छः दिवसीय कार्यक्रम के पांचवें दिन की शुरुआत आदित्य कुमार जी के योग सत्र से हुई। इसके बाद के सत्र में आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर प्रो. अभिषेक पाठक ने “न्यूरोसाइंस ऑफ़ योगा एंड माइंडफुलनेस” विषय पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान दिया। प्रो. पाठक ने बताया कि योग और माइंडफुलनेस केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि उनके पीछे ठोस वैज्ञानिक आधार मौजूद हैं। उन्होंने मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य पर इन अभ्यासों के प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए माइंडफुलनेस-बेस्ड स्ट्रेस रिडक्शन और माइंडफुलनेस-बेस्ड कॉग्निटिव थैरेपी जैसे प्रमाणित तरीकों की चर्चा की। इन तकनीकों के माध्यम से तनाव को नियंत्रित करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और सजगता को विकसित करने के व्यावहारिक सुझाव प्रतिभागियों को दिए गए, जिससे वे अपने दैनिक जीवन में अधिक सशक्त और संतुलित अनुभव कर सकें। सत्र की दूसरी वक्ता, डॉ. सविता शर्मा, मानव रचना विश्वविद्यालय, फरीदाबाद, हरियाणा, ने “शिक्षण में माइंडफुलनेस के शैक्षणिक अनुप्रयोग” विषय पर वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने शिक्षण प्रक्रियाओं में सजगता के प्रयोग से छात्रों और शिक्षकों दोनों के अनुभव को अधिक प्रभावी और जागरूक बनाने के उपाय बताए। डॉ. शर्मा ने एक प्रायोगिक ध्यान सत्र का भी संचालन किया, जिससे प्रतिभागियों को माइंडफुलनेस का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ और उन्होंने अपने आंतरिक मानसिक वातावरण से जुड़ने की प्रक्रिया को गहराई से समझाया। इस कार्यकम का संयोजन प्रो. अजय कुमार सिंह तथा सहसंयोजन डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी व डॉ. कुशाग्री सिंह द्वारा किया जा रहा है।
