
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए निर्देश के क्रम में उत्तर प्रदेश को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त करने के संकल्प के उद्देश्य से शुक्रवार को अपर आयुक्त, वाराणसी मंडल सुभाष यादव की अध्यक्षता में यूनिसेफ के सहयोग से कमिश्नरी ऑडिटोरियम में श्रम विभाग द्वारा मंडलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मंडल के सभी जिलों से आए प्रतिभागियों ने वाराणसी मंडल को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त करने हेतु कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में राज्य कार्ययोजना के अनुसार वाराणसी मंडल के सभी जिलों में बाल श्रम उन्मूलन हेतु की जाने वाली कार्यवाहियों व उसमें विभिन्न विभागों की भूमिका पर चर्चा हुई। कार्यशाला में वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली के शिक्षा, महिला कल्याण, श्रम, पुलिस, कौशल विकास, अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाइयों (डीसीपीयू) बाल हेल्पलाइन (सीसीएल) और मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों के साथ-साथ यूनिसेफ के अधिकारियों ने भी भाग लिया।अपर आयुक्त सुभाष यादव ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल श्रम एक गंभीर और सामाजिक मुद्दा है, जिसके लिए हर विभाग, समुदायों और अन्य हितधारकों द्वारा ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने बचाए गए बाल श्रमिकों के पुनर्वास से संबंधित विभिन्न मुद्दों जैसे चिकित्सा परीक्षा, आश्रय, शिक्षा और परिवहन पर भी ध्यान दिया। उन्होंने बाल श्रमिकों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के लिए बाल श्रम कार्य बल की नियमित बैठकें आयोजित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देकर और गुणवत्ता प्रदान करके बाल श्रम की प्रथा को समाप्त करने के लिए माता-पिता, समुदायों और व्यावसायिक समुदायों को जुटाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ हेलेन आर सेकर, पूर्व वरिष्ठ फेलो, वीवी गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के साथ-साथ परामर्श के लिए नियुक्त विशेषज्ञ ने परामर्श के दौरान बाल श्रम से जुड़े विभिन्न मुद्दों के बारे में बात की थी। उन्होंने बाल श्रम समस्या के साथ-साथ राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों जैसे उत्तर प्रदेश के पीतल, ताला, कालीन, कांच कारखानों में बाल श्रम की विस्तृत एकाग्रता का विस्तृत विवरण प्रदान किया। उन्होंने बाल श्रम के आंकड़ों और प्रवृत्तियों के साथ-साथ बाल श्रम के खिलाफ संवैधानिक और कानूनी ढांचे पर भी प्रकाश डाला। डॉक्टर सेकर ने बताया कि बाल श्रम से मुक्ति एक बच्चे का मौलिक मानवाधिकार है। यह भारतीय संविधान और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संधियों और समझौतों में निहित है। कार्यशाला में श्रम विभाग के राज्य समन्वयक सैय्यद रिजवान अली द्वारा राज्य कार्य योजना में बाल श्रम उन्मूलन हेतु विभिन्न विभागों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी के साथ विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। अपर पुलिस आयुक्त दिगम्बर विश्वास ने ज्यादा से ज्यादा बच्चों को शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के साथ ही बाल से सम्बन्धित कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। यूनिसेफ के बाल अधिकार विशेषज्ञ दिनेश कुमार ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए ग्राम स्तर पर बाल संरक्षण ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। मानव विकास संस्थान के भानुजा शरण द्वारा प्रवासी व ट्रैफिकिंग की स्थिति के संबंध में प्रस्तुतिकरण किया गया।
कार्यशाला के प्रारंभ में सहायक श्रम आयुक्त वाराणसी अविनाश तिवारी ने सभी का स्वागत किया तथा सहायक श्रम आयुक्त जौनपुर देवव्रत यादव ने अपने संबोधन में कार्यशाला के उद्वेश्य के संबंध कराया। सभी प्रतिभागियों से जिलावार समूह में अपने अपने जिले को 2027 तक बाल श्रम मुक्त करने पर मंथन किया।
