तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ 

 

वाराणसी। शुक्रवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र, बीएचयू, वाराणसी व विश्व आयुर्वेद परिषद के संयुक्त तत्वावधान में 19 से 21 सितंबर 2025 तक तीन दिवसीय “साइंटिफिक राइटिंग, रिसर्च इंटीग्रिटी एंड पब्लिकेशन एथिक्स” विषयक कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। मुख्य अतिथि प्रो० बी०एल० मेहरा, अध्यक्ष, राष्ट्रीय आयोग भारतीय चिकित्सा पद्धति, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं विशिष्ट अतिथि प्रो० कमलेश कुमार द्विवेदी, सदस्य, विश्व आयुर्वेद परिषद व राष्ट्रीय आयोग, भारतीय चिकित्सा पद्धति रहे।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो० प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने की।

यह कार्यशाला राष्ट्रीय आयोग, भारतीय चिकित्सा पद्धति, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत तथा प्रतिभागियों के 10 क्रेडिट प्वॉइंट प्रशिक्षण पर केंद्रित है।

अपने उद्बोधन में प्रो० बी०एल० मेहरा ने कहा कि “वैज्ञानिक लेखन और शोध की पारदर्शिता से ही भारतीय चिकित्सा पद्धति विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकती है। शोधार्थियों और शिक्षकों को नैतिकता एवं गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।” प्रो० कमलेश कुमार द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “भारतीय चिकित्सा और आयुर्वेद की आत्मा सत्यनिष्ठा और शुचिता में है। यदि हम शोध और प्रकाशन में नैतिक मानदंडों का पालन करें तो निश्चित ही हमारी परंपरा वैश्विक स्तर पर अत्यधिक सशक्त हो सकती है।” समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो० प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू, वाराणसी ने कहा कि “शिक्षण, शोध एवं नवाचार तभी सार्थक होंगे जब उनमें नैतिकता, जिम्मेदारी और सृजनशीलता शामिल होंगे। यह कार्यशाला अध्यापकों और शोधार्थियों को इसी दिशा में प्रेरित करने का एक सशक्त प्रयास है।”

कार्यशाला के पहले दिन शिक्षण, शोध एवं विस्तार, नवाचार और सृजनशीलता इत्यादि महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित सत्रों का आयोजन हुआ। जिसमें चार विषय विशेषज्ञों- डॉ० उमापति सी० बरगी, उत्तराखण्ड, डॉ० गिरिधर वेदान्तम, गोरखपुर, उ०प्र०, डॉ० मधुसूदन बी०जी०, मैसूर, कर्नाटक तथा डॉ० शिरोमणि मिश्रा, भोपाल, मध्य प्रदेश ने वैज्ञानिक लेखन, शोध नैतिकता एवं प्रकाशन शुचिता से जुड़े विविध पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण व्याख्यान व प्रशिक्षण दिया।

इस कार्यशाला के समन्वयक डॉ० विजय कुमार राय, अध्यक्ष, विश्व आयुर्वेद परिषद, उत्तर प्रदेश चैप्टर; संयोजक प्रो० अजय कुमार सिंह, आईयूसीटीई, आयोजन सचिवद्वय डॉ० मनीष मिश्रा एवं डॉ० आशुतोष कुमार पाठक, सह-संयोजक डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी, आईयूसीटीई और कोषाध्यक्ष डॉ० राम निहोर तापसी हैं। इस कार्यशाला में देशभर से बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ भाग ले रहे हैं।

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