वाराणसी । विगत दिनों समाचार पत्रों के माध्यम से काशी के स्वर्ण रजत कारीगरों के कारखानों व उनके मकान मालिकों को पुलिस प्रशासन के द्वारा नोटिस जारी किए जाने की सूचना को संज्ञान में लेकर सर्राफा व्यवसायियों व कारीगरों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है।

ज्ञात हो कि वाराणसी में सर्राफा व्यवसाय से जुड़ी पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी है। यहां सैकड़ो वर्षों से स्वर्ण रजत व्यवसाय के कारीगर अपने-अपने घरों में अपना पुस्तैनी कारोबार करते चले आ रहे हैं। इस समय काशी में केवल स्थानीय सोनार ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न प्रांतो के हजारों कारीगर भी यहां कारीगरी कर रहे हैं। जिसमें पश्चिम बंगाल के लगभग 10000 कारीगरों सहित राजस्थान, महाराष्ट्र एवं पंजाब के भी हजारों कारीगरों के जीविकोपार्जन का माध्यम यह व्यवसाय बना हुआ है। पिछले दिनों चौक थाना क्षेत्र में एक स्वर्ण आभूषण बनाने के कारखाने में आग लगने से तीन कारीगर झुलस जाने के बाद चौक थाना प्रशासन द्वारा यहां की कई कारखानों के मालिकों तथा उनके मकान मालिकों को नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है, इससे मार्केट में जबरदस्त आक्रोश व भय व्याप्त है।

थाना चौक प्रशासन के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ सोमवार को ठठेरी बाजार स्थित शेरवाली कोठी में आयोजित बैठक में उपस्थित सैकड़ो कारीगर व व्यवसायी सम्मिलित हुए। जिसमें उच्चाधिकारियों से वार्ता करने के लिए तेरह सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया गया।

बैठक में शामिल वक्ताओं ने

चौक थाना प्रशासन से इस तुगलकी फरमान को वापस लेने की मांग की गई।

बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष राकेश वर्मा, संचालन सुमित वर्मा तथा धन्यवाद प्रकाश मंत्री जतिन रस्तोगी ने किया।

बैठक में मुख्य रूप से प्रद्युम्न जी अग्रवाल, विजय तिवारी, संजय अग्रवाल, रवि सर्राफ, शरद जी अग्रवाल, पंकज सर्राफ, जतिन रस्तोगी, भोक्ति मैती, गणेश मंडल, कमल कुमार सिंह, किशोर सेठ, संतोष पाटिल, अन्ना मोरे, सुनील सेठ, अजय जैन मीडिया प्रभारी पवन मिश्रा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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