वाराणसी। डॉ. घनश्याम सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय (सोयेपुर) लालपुर में सोमवार को हिंदी विभाग की ओर से राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना के उन्नायक मैथिलीशरण गुप्त विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्यिक योगदान और राष्ट्रीय जागरण में उनकी भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुँचाना था। मुख्य वक्ता डॉ. बलजीत श्रीवास्तव (सहायक निदेशक, राजभाषा एवं सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ) ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त केवल एक कवि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत थे, जिन्होंने ‘भारत-भारती’, ‘साकेत’ और ‘यशोधरा’ जैसी रचनाओं के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में जनमानस में देशप्रेम और सांस्कृतिक गर्व की भावना जगाई।उन्होंने कहा कि ‘भारत-भारती’ जैसी कृति ने सोई हुई राष्ट्रीय अस्मिता को जागृत किया और भारतवासियों को अपने गौरवशाली अतीत की याद दिलाई। गुप्त जी का काव्य भारतीय संस्कृति, इतिहास और नैतिक मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था।अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रबंधक नागेश्वर सिंह ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि गुप्त ने राष्ट्रीय चेतना के सूत्र भारत के स्वर्णिम अतीत से लिए और अपनी कविताओं से नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे गुप्त जी के साहित्य से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। संचालन डॉ. गौरव तिवारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विवेकानंद चौबे ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. शैलजा राय, अंकिता यादव, अभिषेक गुप्ता सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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