वाराणसी ।दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की प्रारम्भ का प्रतीक है, जिसमें वे अपने ज्ञान और कौशल का व्यावहारिक प्रयोग करने का संकल्प लेते हैं। दीक्षांत से अभिप्राय है, छात्राओं ने जो उपाधि प्राप्त की है, उनके जीवन का सैद्धांतिक पक्ष था। अब उन्हें अपने ज्ञान और कौशल का व्यावहारिक प्रयोग करने का समय आ गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को विनय, योग्यता और धन के सही उपयोग की प्रेरणा दी।

उक्त विचार संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने आयोजित होने वाले 43 दीक्षांत समारोह के पूर्वसंध्या पर मंगलवार को दीक्षांत स्थल मुख्यभवन में पूर्वाभ्यास के दौरान व्यक्त किया।

शिष्टमंडल के सदस्यों ने शोभायात्रा के साथ दीक्षांत मण्डप में प्रवेश किया।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने दीक्षांत मण्डप या स्थल का मंगलवार को विधि पूर्वक पूजन कर सकुशल दीक्षांत समारोह सम्पन्न कराने के लिए किया गया।

कुलपति की अध्यक्षता में क्रमशः विद्यापरिषद एवं कार्यपरिषद में यहां के सभी क्रमशः मध्यमा, पूर्वध्यमा सहित शास्त्री,आचार्य एवं विद्यावारिधि, विद्यावाचस्पति में 11476 उपाधियों एवं 58 मेडल/पदक पर मुहर लगा।जिसको दिनांक 08 अक्टूबर को अपरान्ह 3:00 बजे उत्तर प्रदेश की कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल उपाधियों एवं मेडल को वितरित करेंगी।

उक्त दीक्षांत में भारत सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि,विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश के उच्चशिक्षा मंत्री तथा सारस्वत अतिथि उच्चशिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी होंगी।

पूर्वाभ्यास के शोभायात्रा में कुलपति के साथ न्यायमूर्ति श्री अनिरुद्ध सिंह, कुलसचिव श्री राकेश कुमार,प्रो रामपूजन पांडेय, प्रो जितेन्द्र कुमार, प्रो रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो सुधाकर मिश्र, प्रो हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो नीलम गुप्ता, प्रो विधु द्विवेदी, प्रो रमेश प्रसाद, प्रो शैलेश कुमार, प्रो राजनाथ, प्रो शंभू नाथ शुक्ल, प्रो दिनेश कुमार गर्ग,प्रो विद्या कुमारी, डॉ विशाखा शुक्ला आदि शामिल रहे।

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