
आरोग्य एवं आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के दर्शन को उमड़े देश-विदेश के श्रद्धालु
मनुष्य का असली धन स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण है: समीर कुमार शास्त्री
वाराणसी। धनतेरस के पावन अवसर पर कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को सुड़िया स्थित राजवैद्य स्व. पं. शिव कुमार शास्त्री के धन्वंतरि निवास में भगवान धन्वंतरि पूजनोत्सव का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। दोपहर 12 बजे मंदिर का कपाट खोले जाने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान धन्वंतरि चांदी के सिंहासन पर विराजमान थे। उनके चारों हाथों में अमृत कलश, चक्र, शंख और जोंक सुशोभित थे, जो आरोग्य और जीवन के संतुलन का प्रतीक माने जाते हैं। भगवान को विशिष्ट चमत्कारी औषधियों रस, स्वर्ण, हीरा, माणिक, पन्ना, मोती तथा औषधीय जड़ी-बूटियों जैसे केसर, कस्तूरी, अंबर, अश्वगंधा, अमृता, शंखपुष्पी, मूसली का विशेष भोग अर्पित किया गया। भगवान के श्रृंगार में हिमालय से मंगाए गए आर्किड, लिली, गुलाब, ग्लेडियोलस, रजनीगंधा, तुलसी और गेंदा के पुष्पों का प्रयोग किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर दिव्य आभा से नहाया हुआ प्रतीत हो रहा था। शास्त्रोक्त विधि से पूजन एवं आरती का आयोजन पं. रामकुमार शास्त्री, पं. नंदकुमार शास्त्री, समीर कुमार शास्त्री, उत्पल शास्त्री, आदित्य, मिहिर एवं कोमल शास्त्री ने सपरिवार संपन्न किया। इस दौरान मंदिर परिसर में शहनाई की मंगलधुन वातावरण में गूंज उठी।
औषधीय पुष्पों और धूप की सुगंध ने वातावरण को आरोग्यदायी बना दिया। श्रद्धालु अपने आपको तन-मन से निरोग और शांत महसूस कर रहे थे। शाम पाँच बजे से श्रद्धालुओं का आगमन आरंभ हुआ, जो देर रात तक जारी रहा। देश के विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भगवान धन्वंतरि की अष्टधातु निर्मित दिव्य प्रतिमा का दर्शन किया और आरोग्य, दीर्घायु तथा समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उत्पल शास्त्री ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि आदित्य विक्रम शास्त्री और मिहिर विक्रम शास्त्री ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।
पूजन के उपरांत आरती के समय “ॐ धन्वंतरये नमः” के मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आरोग्य रस से परिपूर्ण हो गया। इस अवसर पर समीर कुमार शास्त्री ने कहा मनुष्य का असली धन स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण है। धन्वंतरि जी की कृपा से जो आरोग्य प्राप्त करता है, वही सच्चा धनवान है।
