
प्रेमचंद की कहानी निर्वासन का पाठ
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही द्वारा संचालित दैनिक कार्यक्रम ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ के 1714 दिन पूरे होने पर रविवार को प्रेमचंद स्मारक लमही में विशेष साहित्यिक आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रेमचंद की मार्मिक कहानी ‘निर्वासन’ का पाठ समाजसेवी अशोक कुमार पांडेय ने किया। कहानी के माध्यम से समाज में तिरस्कृत और अकेलेपन से जूझते व्यक्ति की व्यथा को उजागर किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि यह कहानी समाज में व्याप्त रूढ़ियों और मानवीय संवेदनाओं की कमी को रेखांकित करती है।
प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि निर्वासन प्रेमचंद की सामाजिक यथार्थवादी दृष्टि का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। कार्यक्रम में साहित्यकार संतोष पांडेय, दिनेश श्रीवास्तव, रत्नेश राय, विजेयेन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. व्योमेश चित्रांश, सूर्यभान सिंह, अजय यादव सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। स्वागत डॉ. व्योमेश चित्रवंश, संचालन आयुषी दूबे और धन्यवाद ज्ञापन मनोज विश्वकर्मा ने दिया।
