वाराणसी।वसंत कन्या महा विद्यालय में संचालित छह दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन अफ्रीका के ओल्डुवाई गॉर्ज के विशेष संदर्भ में आधुनिक मानव के विकास की यात्रा पर बात हुई।

मुख्य वक्ता एशियाटिक सोसायटी की मानवशास्त्र-सचिव कलकत्ता की प्रोफेसर रंजना रे ने अफ्रीका के पुरास्थल ओल्डुवाई गॉर्ज के मानव अवशेषों का उसकी जलवायु और पारिस्थितिकी तथा पाषाण उपकरणों की प्राप्ति के साथ तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। उनका संवाद उनके पांच दशकों से अधिक समय के प्रत्यक्ष और प्रायोगिक अनुभवों पर आधारित था जिसने प्रस्तुति की तकनीकी बारीकियों को आधुनिक सांस्कृतिक विमर्शों के साथ संतुलित रूप से प्रस्तुत किया।

भारत की सीमाओं में अतीत की पारिस्थितिकी को रख कर उन्होंने भारतीय पुरैतिहास का विहंगम चित्र प्रस्तुत किया। कार्यशाला के तीसरे सत्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ गार्गी चटर्जी ने पाषाण उपकरणों के निर्माण को प्रयोगों के आधार पर समझाया।

कार्यशाला की शुरुआत प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव के संबोधन से हुई।

अतिथि वक्ताओं का स्वागत संयोजिका डॉ आरती कुमारी ने किया। कार्यशाला में इलाहाबाद विश्वविद्यालय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय तथा संबद्ध महाविद्यालयों और सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परास्नातक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों सहित 75 पंजीकृत प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर डॉ राजीव रंजन, डॉ राजीव जायसवाल, डॉ नैरंजना श्रीवास्तव,आरती चौधरी, डॉ आराधना सिंह, डॉ रवि कुमार, डा दीक्षा आदि उपस्थित रहे। विभाग के क्लब एंटिक्विटी की आयोजन में विशेष भूमिका रही।

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