
वाराणसी। प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही स्थित प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कार्यक्रम के 1735वें दिवस पर प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि बच्चों की नैसर्गिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का मार्ग है। उन्होंने बताया कि मुंशी प्रेमचंद बच्चों को नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता, आत्मविश्वास और अनुभव आधारित शिक्षा देने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि बच्चों को घर-परिवार के निर्णयों में शामिल किया जाए, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें। बाल कलाकार संस्कृति पाण्डेय और अभिनव कुशवाहा ने प्रेमचंद की कहानियाँ नादान दोस्त और पागल हाथी का मनोहारी पाठ किया। व्यंग्यकार सूर्यदीप ने पागल हाथी कहानी के माध्यम से बताया कि करुणा और प्रेम ही मनुष्य और जीव-जंतुओं की पीड़ा का वास्तविक उपचार है, न कि दंड। इस अवसर पर प्रो. श्रद्धानंद, राजीव गोंड और रामजतन पाल ने बाल कलाकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सुरेश चंद्र दूबे, अशोक पाण्डेय, कनक लता पाण्डेय, ललीता यादव, अजय यादव, चन्द्रानन पाल, भार्गवी पाल, काश्वी पाण्डेय, राहुल यादव, रोहित गुप्ता सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। संचालन आयुषी दूबे और आभार व्यक्त अशोक पाण्डेय ने किया।
