
वाराणसी। विश्व बाल दिवस के अवसर पर सोशल एक्शन एंड रिसर्च सेंटर (SARC), UPCEG उत्तर प्रदेश और वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट द्वारा वसंत कन्या इंटर कॉलेज, कमच्छा में किशोरियों के लिए एक व्यापक साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम “साइबर क्राइम: पहचानें और सुरक्षित रहें” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्य वक्ता सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम एवं साइबर सुरक्षा) श्री विदुष सक्सेना ने साइबर फ्रॉड, फ़िशिंग, ऑनलाइन बुलिंग, पहचान की चोरी, साइबर स्टॉकिंग, ब्लैकमेलिंग, डिजिटल फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, आर्थिक धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड, फर्जी नौकरी ऑफर, मोबाइल कैमरा–माइक्रोफोन हैकिंग तथा साइबर अपराधों में AI के दुरुपयोग जैसे खतरों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने सुरक्षित पासवर्ड बनाने, संदिग्ध लिंक से बचने और सोशल मीडिया प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत करने के व्यावहारिक उपाय भी बताए। ACP सक्सेना ने बड़े स्क्रीन पर वास्तविक उदाहरण दिखाकर छात्राओं को बताया कि कैसे ‘संचार साथी’ ऐप के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति के आधार पर कितने मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं—जिनका उपयोग अपराध में भी हो सकता है। साथ ही उन्होंने किसी भी साइबर खतरे की स्थिति में त्वरित शिकायत पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 का प्रयोग करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की।
SARC की सचिव सुश्री रंजना गौड़ ने कहा कि विश्व बाल दिवस बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को समर्पित है। डिजिटल युग में साइबर खतरों से बचाव भी अब बच्चों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बताया कि महिलाओं एवं किशोरियों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराध उनकी गोपनीयता, सम्मान और सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
SARC और पुलिस कमिश्नरेट का यह संयुक्त प्रयास किशोरियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय कदम साबित हुआ। कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें बालिकाओं ने साइबर सुरक्षा से जुड़े अपने प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किया।
