वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में “मिशन शक्ति के विशेष अभियान (फेज-5) का आयोजन के अन्तर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में रविवार को “साइबर सुरक्षा” की जानकारी हेतु विशेष व्याख्यान कार्यक्रम’ विषय पर आधुनिक भाषा एवं भाषा विज्ञान विभाग में माननीय कुलपति बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर एसपी सिंह डीन सोशल साइंस और रजिस्ट्रार चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पटना ने अपने संबोधन में साइबर क्राइम के विभिन्न पहलुओं जैसे डिजिटल अरेस्टिंग, बैंक ओटीपी धोखाधड़ी, एटीएम पासवर्ड हैकिंग पर विस्तार से चर्चा की।

व्याख्यान के दौरान प्रो सिंह कहा कि साइबर, इंटरनेट, सोशल मीडिया के बहुत सारे फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं विशेषतः महिलाओं के लिए आजकल साइबरस्टॉकिंग किसी महिला के लिए जोखिम का एक बड़ा विषय बनता जा रहा है। यह खतरनाक हो सकता है और शारीरिक शोषण में विकसित हो सकता है। साइबरस्टॉकिंग की रिपोर्ट करने का इंतजार न करें। जितनी देर तक साइबर हमले होते रहेंगे, आप उतनी ही भावनात्मक, मानसिक या शारीरिक रूप से समस्या झेलेंगी।साइबरस्टॉकिंग को हराना मुश्किल है क्योंकि स्टाकर दूसरे राज्य में भी हो सकता है या फिर पीड़ित से तीन क्यूबिकल दूर भी बैठा हो सकता है। इंटरनेट की गुमनाम दुनिया में, एक स्टॉकर की पहचान को सत्यापित करना, गिरफ्तारी के लिए आवश्यक साक्ष्य एकत्र करना और फिर उसके भौतिक स्थान का पता लगाना मुश्किल है, इसलिए हमेशा सुरक्षा के पहलुओं की अनदेखी न करते हुए सुरक्षित रहना और ऑनलाइन संसाधनों का बहुत प्रभावी ढंग से उपयोग करना बेहतर होता है।

आई क्यू ए एस के समन्वयक प्रो रमेश प्रसाद ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि तथ्य यह है कि साइबरस्टॉकिंग में शारीरिक संपर्क शामिल नहीं है, इसका मतलब यह नहीं है कि यह “वास्तविक जीवन” में होने वाली स्टॉकिंग की तुलना में कम खतरनाक है। एक अनुभवी इंटरनेट यूजर (साइबर स्टॉकर) के लिए आपकी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि फ़ोन नंबर या आपके दोस्तों, रिश्तेदारों, आपके काम करने की जगह आदि को ढूंढना मुश्किल नहीं है।

कोई व्यक्ति एक दिन या सप्ताह में अधिकतम बार आपकी प्रोफ़ाइल पर जाता है- कोई आपकी पोस्ट या तस्वीरों पर गलत तरीके से टिप्पणी करता है या अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करता है।

कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर आपकी व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी के बारे में पूछता है।कोई आपसे फोटो और वीडियो मांगता है यदि आप इस प्रकार की गतिविधियों को महसूस करती हैं, तो नजरअंदाज न करें और तुरंत इसके संबंध में कार्यवाही करें।

नोडल अधिकारी प्रो विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि साइबरस्टॉकिंग को हराना मुश्किल है क्योंकि स्टाकर दूसरे राज्य में भी हो सकता है या फिर पीड़ित से तीन क्यूबिकल दूर भी बैठा हो सकता है। इंटरनेट की गुमनाम दुनिया में, एक स्टॉकर की पहचान को सत्यापित करना, गिरफ्तारी के लिए आवश्यक साक्ष्य एकत्र करना और फिर उसके भौतिक स्थान का पता लगाना मुश्किल है, इसलिए हमेशा सुरक्षा के पहलुओं की अनदेखी न करते हुए

सोशल मीडिया पर अनजान लोगों को दोस्त ना बनायें।

अपनी वित्तीय जानकारी किसी के साथ साझा ना करें और ना ही अपने एटीएम के पासवर्ड आदि को ऑनलाइन सेव करें।

साइबर अपराध से संबंधित शिकायत दर्ज करने के लिए cybercrime.gov.in पर विजट करें या 1930 डायल करें।

मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत आधुनिक भाषा एवं भाषा विज्ञान विभाग के सभागार में डॉ शशीन्द्र मिश्र जनसम्पर्क अधिकारी संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने भी अपनी बात रखी और साइबर सुरक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

इसके अतिरिक्त आधुनिक भाषा एवं भाषा विज्ञान विभाग के समस्त अध्यापकगण एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्रगण सभागार में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन डा० सग्रधरा शर्मा अध्यापिका आधुनिक भाषा एवं भाषाविज्ञान विभाग द्वारा किया गया।

धन्यवाद ज्ञापन डॉ विजय शर्मा वेद विभाग संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने किया।

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