वाराणसी। उदय प्रताप कॉलेज का 116वां संस्थापन समारोह मंगलवार को राजर्षि सभागार में परंपरा, संस्कृति और गौरव के भव्य समागम के रूप में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, गुजरात के कुलपति प्रो. आर.एस. दूबे ने कहा कि गुलामी के दौर में राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव ने मूल्य निर्माण और राष्ट्रीय चेतना का जो दीप प्रज्वलित किया था, वही आगे चलकर मालवीय जी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय और शिवप्रसाद गुप्त के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ जैसे ऐतिहासिक संस्थानों की प्रेरणा बना। उन्होंने कहा कि राजर्षि की मूल्यनिष्ठ शिक्षा की यही भावना आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की आधारशिला है। अध्यक्षता कॉलेज के पूर्व छात्र एवं पूर्व शिक्षक विधायक चेतनारायण सिंह ने करते हुए कहा कि अज्ञानता ही गुलामी का कारण रही और मूल्य आधारित शिक्षा ही इसकी मुक्ति का मार्ग है।

समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब उदय प्रताप शिक्षा समिति के सचिव तथा कॉलेज के प्राचीन छात्र यू.एस. सिन्हा ने कहा—“यह कॉलेज सिर्फ इमारत नहीं, राजर्षि की आत्मा का जीवंत स्वरूप है।” कॉलेज की ओर से उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

इसके अलावा अवकाशप्राप्त शिक्षकों प्रो. चंद्र प्रकाश सिंह, प्रो. उपेंद्र कुमार, प्रो. गरिमा सिंह, वंदना सिंह और अरुण कुमार सिंह को भी सम्मानित किया गया।

सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम में छात्राओं ने मंगल गीत, भजन और राम–सीता विवाह पर आधारित लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से सभागार को भाव विभोर कर दिया। प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कॉलेज की पांचों इकाइयों की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया और कहा कि संस्था का उद्देश्य राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव की शिक्षा–चेतना के अनुरूप विद्यार्थियों में ज्ञान, चरित्र और मूल्य का विकास करना है।

संचालन प्रो. प्रज्ञा पारमिता सिंह एवं डॉ. ज्ञान प्रभा सिंह ने किया। बड़ी संख्या में उपस्थित शिक्षकों, पूर्व छात्रों और विद्यार्थियों ने समारोह की गरिमा को और ऊँचा किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह, डॉ. रमाशंकर सिंह, प्रो. नरेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. गोरखनाथ, डॉ. विजय बहादुर सिंह, प्रो. सुधीर कुमार राय, प्रो. रमेशधर द्विवेदी, प्रो. संजय कुमार शाही एवं प्रो. शशिकांत द्विवेदी भी उपस्थित रहे।

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