
वाराणसी।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई), वाराणसी द्वारा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के ग्लोबल साउथ (साउथ– साउथ कोऑपरेशन) के अंतर्गत इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन कार्यक्रम के तहत अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “द डिजिटल पेडागॉजी: एजुकेटर्स फॉर टुमॉरो (The Digital Pedagogy: Educators for Tomorrow)” का आयोजन 15–21 दिसंबर 2025 तक किया जा रहा है। यह कार्यक्रम ग्लोबल साउथ के देशों के शिक्षकों को डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करने और भविष्य- उन्मुख शिक्षण पद्धतियों से सशक्त बनाने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान, तकनीक, शिक्षण कौशल को प्रचारित प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उक्त जानकारी केंद्र के निदेशक प्रो प्रेम नारायण सिंह ने पत्रकार वार्ता दी।
उन्होंने कहा इस सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में डिजिटल पेडागॉजी, मानवीय विकास, ब्रेन साइंस, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (एसईएल), यूनिवर्सल डिज़ाइन फॉर लर्निंग (यूडीएल), डिजिटल नागरिकता, समावेशी कक्षा-डिज़ाइन, और तकनीक-सक्षम मूल्यांकन पर विस्तृत मॉड्यूल शामिल हैं। प्रतिभागी लाइव वर्कशॉप, डिजिटल असाइनमेंट, केस स्टडी, समावेशी पाठ-डिज़ाइन गतिविधियों, और पाठ योजना प्रस्तुति के माध्यम से तकनीकी एवं भावनात्मक रूप से समर्थ शिक्षण वातावरण तैयार करना सीखेंगे।
यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को विविध शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को समझने, डिजिटल टूल्स का सुरक्षित उपयोग करने, और कक्षाओं में नवाचार लागू करने की व्यापक क्षमता प्रदान करेगा।
निदेशक कहा यह कार्यक्रम डिजिटल पेडागॉजी की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित करता है और 21वीं सदी के शिक्षकों के लिए आवश्यक कौशलों के विकास को बढ़ावा देता है। यह पहल शिक्षकों को समावेशी, भावनात्मक रूप से संवेदनशील तथा तकनीक-सक्षम शिक्षण वातावरण तैयार करने हेतु सक्षम बनाएगी, भारत की वैश्विक शिक्षा-नेतृत्व भूमिका को मजबूत करेगी तथा साउथ–साउथ कोऑपरेशन को नई गति प्रदान करेगा।
यह कार्यक्रम भविष्य के शिक्षण परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए आईयूसीटीई द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें डिजिटल क्षमता, सहानुभूति-आधारित शिक्षण, मूल्यांकन नवाचार और वैश्विक शिक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण शामिल है। यह कोर्स शिक्षकों को आजीवन सीखने और डिजिटल साक्षरता की ओर प्रेरित करेगा।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीलंका, बेलारूस, कम्बोडिया, इक्वाडोर, घाना, कजाकिस्तान, केन्या, मोरक्को, मोज़ाम्बिक, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, रूस, रवांडा, तंजानिया, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, इथियोपिया, ताजिकिस्तान, ज़ाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, कोट द’ईवोआर, और ट्रिनिडाड और टोबैगो 24 देशों के 40 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं। उनकी सहभागिता से यह पहल ग्लोबल साउथ के बीच सहयोग, ज्ञान-साझाकरण, और शैक्षिक नवाचारों को एक नई दिशा प्रदान करेगी, साथ ही वैश्विक नागरिकता की भावना के विकास, शैक्षिक- सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं भारतीय ज्ञान के प्रसार की दिशा में एक सार्थक योगदान देगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है। सह-समन्वयक के रूप में डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई और डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
