
वाराणसी। उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की जन्मस्थली (स्मारक) लमही में प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र द्वारा आयोजित सुनो मैं प्रेमचंद कार्यक्रम के 1763वें दिवस पर प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी वज्रपात का पाठ किया गया। कहानी का पाठ मोहम्मद अशफ़ाक सिद्दीकी ने किया। संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि वज्रपात कहानी मानव जीवन में आने वाले अचानक, तीव्र और निर्णायक परिवर्तनों का प्रतीक है, जिसमें भाग्य, सामाजिक अन्याय, अहंकार और मानवीय विवेक का यथार्थवादी टकराव देखने को मिलता है। डा. मनोहर लाल ने कहा कि कहानी का केंद्रीय पात्र सत्ता और अहंकार में चूर होकर कमजोरों पर अत्याचार करता है, किंतु एक अप्रत्याशित घटना उसका अहंकार चूर कर देती है और उसे आत्ममंथन के लिए विवश करती है। इस अवसर पर सम्मान प्रो. श्रद्धानंद, डा. मनोहर और निदेशक राजीव गोंड ने किया। संचालन मनोज विश्वकर्मा, स्वागत दिलीप कुमार ने किया।
