
कार्यशाला का पांचवां दिन
वाराणसी । शुक्रवार को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में “द डिजिटल पेडागॉजी: एजुकेटर्स फॉर टुमॉरो विषय पर सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाँचवें दिन की शुरुआत डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “सीइंग द अनसीन: द आर्ट ऑफ डिजिटल ऑब्ज़र्वेशन एंड फीडबैक” विषय पर व्याख्यान से किया। उन्होंने डिजिटल परिवेश में सूक्ष्म अधिगम व्यवहारों को पहचानने और प्रभावी फीडबैक प्रदान करने की कला पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि सटीक अवलोकन और समयबद्ध फीडबैक से सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। साथ ही उन्होंने शिक्षकों से डिजिटल कक्षाओं में संवेदनशील और अर्थपूर्ण फीडबैक तंत्र अपनाने का आह्वान किया।
दूसरे सत्र में डॉ. दीप्ति गुप्ता सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “मिरर्स ऑफ लर्निंग: मेज़रिंग ग्रोथ इन अ डिजिटल वर्ल्ड” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने डिजिटल शिक्षण में अधिगम प्रगति के आकलन के विभिन्न आयामों को स्पष्ट किया।
उन्होंने बताया कि सतत और बहुआयामी मूल्यांकन से शिक्षार्थियों के विकास को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। साथ ही उन्होंने डिजिटल टूल्स के माध्यम से विकासात्मक आकलन को सुदृढ़ करने पर बल दिया।
तीसरे सत्र में डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “सिग्नल्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग: क्राफ्टिंग मीनिंगफुल असेसमेंट्स ऑनलाइन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ऑनलाइन आकलन को केवल परीक्षा न मानकर सीखने की समझ के संकेत के रूप में देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अर्थपूर्ण आकलन शिक्षार्थियों की सोच और अवधारणात्मक स्पष्टता को उजागर करता है। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों से ऑनलाइन असेसमेंट को अधिक प्रामाणिक और शिक्षण-उन्मुख बनाने का आह्वान किया।
चौथा सत्र एक संयुक्त सत्र था जिसमें डॉ. राजा पाठक एवं डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “डेटा विद हार्ट: ब्लेंडिंग इनसाइट, एविडेंस, एंड एसईएल इन असेसमेंट” विषय पर विस्तार से चर्चा की। इस सत्र में उन्होंने आकलन प्रक्रिया में डेटा-आधारित साक्ष्यों के साथ सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (एसईएल) के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि मानवीय दृष्टिकोण से किया गया डेटा विश्लेषण शिक्षार्थियों की वास्तविक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायक होता है। इसी क्रम में उन्होंने शिक्षकों से आकलन को अधिक संवेदनशील, संतुलित और शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम में श्रीलंका, बेलारूस, कम्बोडिया, इक्वाडोर, घाना, कजाकिस्तान, केन्या, मोरक्को, मोज़ाम्बिक, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, रूस, रवांडा, तंजानिया, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, इथियोपिया, ताजिकिस्तान, ज़ाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, कोट द’ईवोआर, और ट्रिनिडाड और टोबैगो 24 देशों के 40 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई हैं, जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया जा रहा है। सह-समन्वयक के रूप में डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई और डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
