दो दिवसीय ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला का समापन 

 

वाराणसी। चिरईगांव स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र, चिरईगांव, जनपद वाराणसी में शनिवार को 2 दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुआ।

दो दिवसीय कार्यशाला स्पेशल प्रोजेक्ट फॉर इक्विटी के अंतर्गत विद्यालयों में बालिकाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता एवं नेतृत्व क्षमता विकास को लक्ष्य बनाकर आयोजित रहा। कार्यशाला में उप जिलाधिकारी श्री नितिन सिंह एवं खंड शिक्षा अधिकारी, चिरईगांव श्रीमती प्रीति सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।

प्रशिक्षण सत्रों का संचालन मुख्य संदर्भदाता एसआरजी श्री राजीव सिंह एवं एआरपी श्रीमती रश्मि त्रिपाठी ने किया।

कार्यशाला में मीना मंच की अवधारणा, उद्देश्य एवं क्रियान्वयन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को मीना मंच की आधा – फुल छह प्रकार की कॉमिक पुस्तको आदि से परिचित कराया गया। इन कॉमिक पुस्तकों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि कहानियों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मूल्यों, समानता, संवेदनशीलता एवं सकारात्मक सोच का विकास करना है। बच्चों के साथ चर्चा, गतिविधियां, प्रश्र किस प्रकार से जरूरी हैं।

सत्रों में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा प्रक्रिया में व्यक्ति विशेष के बजाय गुणों को महत्व दिया जाए, तथा रूढ़िवादी (स्टेरियोटाइप) सोच से बचते हुए बालिकाओं को निर्णय लेने एवं नेतृत्व के अवसर प्रदान किए जाएँ।

कॉमिक पुस्तकों का निर्माण टीचर स्वयं भी बच्चों से करवा सकता है और एक प्रभावी माध्यम से इस विधा में अपनी बात कह सकता है। इसके अतिरिक्त कार्यशाला में नवाचार एवं प्रगति कार्यक्रम, टूल 10 पर चर्चा, अरमान मॉड्यूल, अभिभावक सहभागिता हेतु एसबीसी सामग्री तथा वीरांगना पोर्टल की उपयोगिता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों से आगामी कार्ययोजना तैयार करवाई गई ताकि विद्यालय स्तर पर मीना मंच की गतिविधियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

मीना मंच एक सशक्त माध्यम है बच्चों की कोशिश को पंख लगाने के लिए, रूढ़ियों को तोड़ने के लिए, सपनों को सच करने के लिए जरूरत है बस दृढ़ इच्छा शक्ति की।

कार्यशाला के समापन अवसर पर समस्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। अधिकारियों ने मीना मंच को बालिकाओं के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सशक्त पहल बताते हुए इसे विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया। इस कार्यशाला में जहां पुराने सुगमकर्ताओं के साथ कुछ नए लोग जुड़े तो नया जज़्बा भी दिखा। जो विद्यालयों में, बच्चों में परिवर्तन के रूप में अवश्य दिखेगा। पूरे कार्यशाला के कुशल आयोजन में श्री मनीष कुशवाहा पूर्व एआरपी का विशेष योगदान रहा।

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