मेरा मकसद सिर्फ देश को आजाद करना है-अशफाक

 

वाराणसी। शनिवार को इप्टा ( भारतीय जन नाट्य संघ ) वाराणसी द्वारा जगतगंज कोठी में दस्तान – ए- अशफाक किस्सागोई के अंतर्गत शहजाद रिजवी एवं फरजाना मेहदी द्वारा लखनऊ के काकोरी कांड की दास्तान श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत की गई , जिसमें क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खान के बारे में विस्तार से बताया गया।

काकोरी कांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक साहसिक और ऐतिहासिक अध्याय है ,जिसमें अशफाक उल्ला खान का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वह राम प्रसाद बिस्मिल के घनिष्ठ मित्र थे और हिंदू मुस्लिम एकता के सजीव प्रतीक भी। 9 अगस्त 1925 को ट्रेन से जा रहे अंग्रेजी खजाने को क्रांतिकारियों ने लूटा था । बाद में अशफ़ाक उल्ला को इस केस के अंतर्गत फांसी की सजा हुई थी। कार्यक्रम आयोजक बाबू जगत सिंह शोध समिति के संरक्षक प्रदीप नारायण सिंह ने इस कलाकारों और संयोजक सलीम राजा तथा सहसंयोजक अशोक आनंद को साधुवाद दिया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बताया मुझे अशफ़ाक उल्ला खान के मजार पर जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह पूरी किस्सागोई हिंदू मुस्लिम एकता का एक जबरदस्त उदाहरण है। संचालन डॉ (मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ हामिद आफाक कुरैशी, अवनिधर ,आनंद तिवारी, डॉ मुक्ता, रामानंद दीक्षित,प्रोफेसर अनुराधा बनर्जी एवं हशम तुराबी उपस्थित रहे।

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