
वाराणसी । रविवार को को अन्तर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में *“द डिजिटल पेडागॉजी: एजुकेटर्स फॉर टुमॉरो विषयक सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।
समापन सत्र का शुभारम्भ मंगलाचरण व मां सरस्वती तथा महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सत्यजीत प्रधान, निदेशक, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र, वाराणसी थे। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. निखिल कुमार, उप सचिव (आईयूसी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), नई दिल्ली रहे, तथा इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने की। प्रो. आशीष श्रीवास्तव, डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) आईयूसीटीई, वाराणसी भी मंच पर उपस्थित रहे। प्रो. आशीष श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. राजा, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने कार्यक्रम की एक संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके उपरांत प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए मूक्स भी प्रदर्शित किए गए। प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव को साझा किया। तत्पश्चात मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, निदेशक, आईयूसीटीई, बीएचयू , और डीन (शैक्षणिक एवं अनुसंधान) द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सत्यजीत प्रधान, निदेशक, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र, वाराणसी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप अपने देश और हमारे देश के बीच सेतु की भूमिका निभाएँगे। उन्होंने शिक्षक की भूमिका और प्रभावी शिक्षण तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए एक महत्वपूर्ण और सार्थक सीख साबित होगा। डॉ. निखिल, उप सचिव (आईयूसी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), नई दिल्ली ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों के लिए भविष्य-कौशल अत्यंत आवश्यक हैं, इसलिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि संस्थान का उद्देश्य ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। इस अवसर पर उन्होंने आईयूसीटीई तथा कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई दी। प्रो. प्रेम नारायण सिंह, निदेशक, आईयूसीटीई, वाराणसी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सीखना महत्वपूर्ण है, किंतु उसका प्रभावी कार्यान्वयन उससे भी अधिक आवश्यक है। उन्होंने अधिति, बोध, अभ्यास, प्रयोग और प्रसार—अधिगम की पाँच चरणीय प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। इसके साथ-साथ उन्होंने कार्यक्रम में सहभागिता के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम में श्रीलंका, बेलारूस, कम्बोडिया, इक्वाडोर, घाना, कजाकिस्तान, केन्या, मोरक्को, मोज़ाम्बिक, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, रूस, रवांडा, तंजानिया, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, इथियोपिया, ताजिकिस्तान, ज़ाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, कोट द’ईवोआर, और ट्रिनिडाड और टोबैगो 24 देशों के 40 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई रहे। जबकि इसका समन्वयन डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा किया गया। सह-समन्वयक के रूप में डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई और डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। केंद्र के अन्य समस्त संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों ने भी इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफल आयोजन प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दिया।
