वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं श्रीकाशी तारक ब्रह्मेन्द्र विद्यामठ, शिवाला घाट, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में वैदिक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित श्रौत याग–अनुष्ठान कार्यशाला का मंगलवार को भव्य समापन हुआ।

यह कार्यशाला दिनांक 18 दिसम्बर 2025 से 23 दिसम्बर 2025 तक श्रीकाशी तारक ब्रह्मेन्द्र विद्यामठ परिसर में आयोजित रहा।

कार्यशाला का आयोजन भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रधान गवेषक डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा के संयोजकत्व में किया गया।

इस अवसर पर वैदिक परम्परा के विद्वान आचार्यों द्वारा श्रौत याग–अनुष्ठानों की सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक विधियों का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को श्रौत कर्मकाण्ड की सूक्ष्मताओं, अनुष्ठान-विधि, मन्त्र-विनियोग एवं यागीय परम्पराओं से परिचित कराते हुए वेद प्रायोगिक कैसे बनाएं इसका विधिपूर्वक प्रशिक्षण कराया गया।

समापन सत्र में विद्वानों ने वैदिक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं भावी पीढ़ी तक उसके हस्तान्तरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

विशिष्ट आमन्त्रित वक्ता प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को निरन्तर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि श्रौत परम्परा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण हम सबका सामूहिक दायित्व है। भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र के वर्तमान समन्वयक प्रो. दिनेश कुमार गर्ग ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आयोजक संस्थाओं, आचार्यों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वैदिक ज्ञान को पुनः प्रतिष्ठापित करना ही भारतीय ज्ञान परम्परा का चरम लक्ष्य है। तथा भविष्य में भी ऐसे शास्त्रसम्मत एवं शोधपरक आयोजनों की निरन्तरता का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मूलाम्नाय काञ्ची शंकराचार्य पीठ के काशी के प्रतिनिधि श्री श्री अमृतानन्द सरस्वती जी महाराज ने यज्ञ के महत्त्व का प्रतिपादनकरते हुए कहा कि सृष्टि के आरम्भ में सबसे पहले यज्ञ के साथ साथ प्रजा की उत्पत्ती हुई। कार्यक्रम का सञ्चालन शेखर द्राविड घनपाठी जी के द्वारा किया गया। मङ्गलाचरण- डॉ. विजयकुमार शर्मा सहायक आचार्य वेद विभाग, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दुर्गेश पाठक सहायक आचार्य न्याय विभाग । संयोजन डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा सहायक आचार्य व्याकरण विभाग ने किया। कार्यक्रम में प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, श्रीकाशी तारक ब्रह्मेन्द्र विद्यामठ विद्यापीठ के प्राचार्य श्रीगोविन्द पाण्डेय, विश्वेश्वरवेदभवन के श्री सुशील पाण्डेय डॉ. गोविन्द पौडेल श्री नागार्जुन अधिकारी, डॉ. आशीष मणि त्रिपाठी,डाॅ. ध्रुव सापकोटा जगदीश तिवारी आदि की महनीय उपस्थिति रही।

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