साईबर सुरक्षा जागरूकता पर मिली जानकारी

 

वाराणसी । बुधवार को वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई-014 “ए” की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप द्वारा “साइबर सुरक्षा जागरूकता” शीर्षक पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं और स्वयंसेवकों को साइबर सुरक्षा के महत्व के बारे में शिक्षित करना और उन्हें आज की डिजिटल दुनिया में डिजिटल खतरों से खुद को बचाने के लिए ज्ञान से लैस करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक “एनएसएस क्लैप” और “लक्ष्य गीत” से हुई। उसके बाद प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. शशि प्रभा कश्यप द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया तथा उसके बाद महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने पूरे कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें साइबर अपराध के बारे में जानना और जागरूक होना चाहिए और आज की दुनिया के डिजिटल खतरे से सुरक्षित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता अब एक वैकल्पिक कौशल नहीं है, बल्कि महिलाओं के सशक्तीकरण और सुरक्षा के लिए एक बुनियादी आवश्यकता है।

कार्यक्रम में “सुरक्षित डिजिटल जीवन के लिए सुरक्षित अभ्यास” विषय पर एक पोस्टर-मेकिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जहाँ प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा को बढ़ावा देने के रचनात्मक तरीके दिखाए तथा एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत एक नाटक भी शामिल था इस नाटक को इसके प्रभावशाली और विचारोत्तेजक संदेश के लिए व्यापक रूप से सराहा गया।

इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वक्ता SARC, वाराणसी की सेक्रेटरी सुश्री रंजना गौर थीं। सुश्री गौर ने साइबर क्राइम के अलग-अलग रूपों जैसे ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, साइबर बुलिंग, आइडेंटिटी थेफ्ट, हैकिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के गलत इस्तेमाल पर एक जानकारी भरा और व्यापक व्याख्यान दिया। उन्होंने फाइनेंशियल फ्रॉड और अनवेरिफाइड लिंक्स के ज़रिए पर्सनल डेटा शेयर करने के खतरों पर डिटेल में बात की। उन्होंने बताया कि कैसे स्कैमर्स फोटो एडिटिंग और एआई टूल्स का उपयोग करके लड़कियों के नकली नग्न वीडियो बनाते हैं और उन्हें ब्लैकमेल करते हैं, जिसे आमतौर पर सेक्सटॉर्शन के रूप में जाना जाता है। सेक्सटॉर्शन से रिलेटेड कई केसेज को शेयर किया।

सुश्री गौर ने साइबर क्राइम के सोशल और साइकोलॉजिकल असर, खासकर महिलाओं और युवा यूज़र्स पर ज़ोर दिया।

उन्होंने स्टूडेंट्स को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म इस्तेमाल करते समय सावधान रहने और साइबर क्राइम के पीड़ितों को मदद और कानूनी मदद के बारे में जागरूकता फैलाकर और सही जानकारी देकर सपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इसके बाद SARC, के इंटर्न श्री गुरु जो नेशनल स्कूल ऑफ़ नरसी मोंजी मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट मुम्बई के स्टूडेंट रह चुके हैं ने आईवीआर कॉल, और एपीके फाइलों के खतरों पर भी प्रकाश डाला, जो रिमोट एक्सेस सॉफ़्टवेयर स्थापित करते हैं, जिससे धोखेबाजों को डिवाइस को नियंत्रित करने की अनुमति मिलती है और बिना सत्यापन के सीधे पैसे ट्रांसफर करने और असत्यापित ऐप डाउनलोड करने से परहेज करने जैसी मैन्युअल ऑनलाइन गतिविधियों से बचने पर जोर दिया।

उन्होंने स्टूडेंट्स को सेफ इंटरनेट प्रैक्टिस के बारे में भी गाइड किया, जिसमें स्ट्रॉन्ग पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, प्राइवेसी सेटिंग्स की इंपॉर्टेंस शामिल है, और स्टूडेंट्स से किसी भी सस्पिशियस एक्टिविटी की तुरंत नेशनल हेल्पलाइन (1930) या ऑफिशियल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए साइबर क्राइम के ऑनलाइन पोर्टल पर रिपोर्ट करने की रिक्वेस्ट की। उनके प्रैक्टिकल एग्जांपल्स और रियल-लाइफ केस स्टडीज़ ने सेशन को बहुत असरदार और जानकारी भरा बना दिया।

इस कार्यक्रम में एनएसएस वॉलंटियर्स ने पोस्टर डिस्प्ले, स्लोगन लिखने, जागरूकता चर्चाओं और इंटरैक्टिव सवाल-जवाब सेशन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। प्रोग्राम साइबर सिक्योरिटी जागरूकता शपथ के साथ खत्म हुआ, जहाँ कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार करने और एक सुरक्षित और ज़िम्मेदार डिजिटल समाज बनाने में योगदान देने की कसम खाई। यह इवेंट बहुत जानकारी देने वाला और सफल साबित हुआ।

सत्र का संचालन एनएसएस स्वयंसेविका भाविका मोहनानी और ज्योति सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कश्यप के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने साइबर सुरक्षा और ज़िम्मेदार डिजिटल नागरिकता को बढ़ावा देने में युवाओं की भूमिका पर ज़ोर दिया तथा एनएसएस वॉलंटियर्स को साइबर सुरक्षा एंबेसडर के तौर पर काम करने और प्रोग्राम से मिली जानकारी को अपने परिवारों और समुदायों तक पहुँचाने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में 173 से अधिक एनएसएस स्वयंसेवक, कार्यक्रम अधिकारी, संकाय सदस्य तथा छात्राएं शामिल हुईं।

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