
वाराणसी।’ त्रैलोक्य न्यारी काशी का कण कण शिव है ।काशी में क्षण भर निवास करने और देव दर्शन करने से ही विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।काशी अनादि तीर्थ है। काशीपुरी उक्त बातें में सातों पुरिया और चारों धाम निवास करते हैं।काशी – काशी कहने मात्र से मुक्ति प्राप्त हो जाती है
उक्त बातें महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर महामृत्युंजय मंदिर में आयोजित काशी महात्म्य कथा एवं महा रुद्राभिषेक के अवसर पर काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पं प्रकाश मिश्रजी महाराज ने कही। श्री मिश्र ने कहा कि संसार की प्राचीनतम धार्मिक नगरी काशी में वास करना यानी साक्षात भगवान शिव को प्राप्त कर लेना है। महाराज जी ने कहा कि –
*असारे खलु संसारे सारमेतचतुष्टयम काश्यां वास: सतां संग : गंगाम्भ: शिव पूजनं* ।
अर्थात इस संसार में चार ही चीज प्रमुख है इसके अलावा कुछ भी नहीं है। काशी में वास ,संतों का साथ, गंगा का पावन सानिध्य और भगवान शिव का पूजन। इस संपूर्ण सृष्टि का सार यही चार चीज है। इससे पूर्व पं आदित्य प्रकाश मिश्र ने सभी श्रद्धालु जनों का स्वागत किया । कार्यक्रम का संचालन चक्रवर्ती विजय नावड ने किया।
रात्रि में पं प्रकाश मिश्र जी के आचार्यत्व में महारुद्राभिषेक एवं सहस्त्रार्चन का आयोजन महामृत्युंजय प्रांगण में स्थित लोमशेश्वर महादेव में किया गया ।जिसमें लगभग 200 सामग्रियों से भगवान का अभिषेक किया गया। साथ ही विभिन्न फलों के रस,मेवा,फल फूल आदि महादेव को समर्पित की गई।सभी भक्तों के बीच हलवा का प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से बद्रीनाथ मिश्रा, एडवोकेट सुनील मिश्रा, संजय सिंह, अभिषेक गुप्ता, हरिओम सेठ ,नवीन राय, दीपांजलि मिश्रा ,नीतू सिंह ,रितु बागलवार आदि उपस्थित थे।
