
सितार पर झंकृत हुआ राजस्थानी लोकधुन केसरिया बालम
वाराणसी। स्पिक मैके एवं संस्कृति विभाग की ओर से काशी में चल रहें शास्त्रीय संगीत यात्रा के चौथे दिन गुरुवार को भारत के ख्याति प्राप्त युवा सितार वादक ध्रुव बेदी नें सितार की मनमोहक धुनों से काशी अनाथालय स्थित वनिता विश्राम का प्रांगण गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल के हिंदुस्तानी शास्त्रीय राग अहीर भैरव से की। आलाप जोड़ झाला के साथ विलंबित द्रुत तीन ताल में प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यार्थी सितार के तारों पर तीव्र गति से चल रहीं हाथों की कलात्मक लय को एकाग्रता के साथ शांत मन से सुनते रहें। छात्र छात्राएँ वैष्णव जन तो… रघुपति राघव राजा राम… की धुन पर तालियों के माध्यम से कलाकार को सम्मान देते रहें। कार्यक्रम के अंत में राजस्थानी लोकगीत केसरिया बालम की धुन को सितार पर झंकृत होते ही सभी झूमने लगे। बजाकर विद्यार्थियों के मन और संगीत को एक करने की कोशिश की। उनके साथ तबले पर पंडित कुबेर नाथ मिश्र ने संगत किया। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि श्रीमती रीता अग्रवाल एवं विनय जैन नें माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया। कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान प्रधानाचार्य संगीता तिवारी नें किया। संचालन प्रीति श्रीवास्तव नें किया। इस अवसर पर स्पिक मैके की प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ शुभा सक्सेना, धवल प्रकाश संगीत विभाग के गौरव मिश्रा, आनंद मिश्रा अनुपम मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राएँ उपस्थित रहें।










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