गोरक्षसंहिता’ ग्रन्थ भेंट कर विश्वविद्यालय के समग्र विकास पर हुआ विस्तृत विमर्श

 

लखनऊ । सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने रविवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ जी से शिष्टाचार भेंट की।

इस गरिमामय अवसर पर कुलपति महोदय ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘गोरक्षसंहिता’ मुख्यमंत्री को सादर भेंट किया, जो भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध साधना-परम्परा का एक महत्वपूर्ण द्योतक है।

भेंटवार्ता के दौरान कुलपति प्रो. शर्मा ने विश्वविद्यालय में संचालित विविध शैक्षणिक, अनुसंधानात्मक, सांस्कृतिक एवं अधोसंरचनात्मक गतिविधियों का समग्र प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में प्रगतिरत निर्माण कार्यों, स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के सुदृढ़ीकरण, प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, तथा नवीन शैक्षिक एवं कौशलोन्मुखी पाठ्यक्रमों के संचालन की विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक विकास के लिए तैयार की गई कार्ययोजनाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप नवाचारों तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली के वैश्विक प्रसार हेतु प्रस्तावित पहलों से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय की प्रगति एवं उसके द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय को भारतीय संस्कृति, दर्शन और संस्कृत शिक्षा के एक सशक्त एवं प्रतिष्ठित केंद्र के रूप में रेखांकित करते हुए इसके सर्वांगीण विकास हेतु राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के भावी विकास, अधोसंरचनात्मक विस्तार, शोध-उन्मुख वातावरण के सुदृढ़ीकरण तथा संस्कृत भाषा एवं भारतीय परम्पराओं के व्यापक प्रसार के विषय में अत्यंत सकारात्मक एवं दूरदर्शी चर्चा हुई।

यह भेंट विश्वविद्यालय एवं राज्य शासन के मध्य समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।

निश्चय ही यह संवाद न केवल सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त करता है, अपितु भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृत भाषा तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रतिष्ठा को नई गति प्रदान करने में भी मील का पत्थर सिद्ध होगा।

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