
वाराणसी ।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “फ्रॉम डेटा टू इनसाइट्स: स्टैटिस्टिकल एनालिसिस विद फ्री एंड एआई-ड्रिवन टूल्स” विषय पर छह दिवसीय शॉर्ट टर्म कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला के पाँचवें दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. राजू डी. चौधरी ने “इंट्रोडक्शन टू आर एंड आरस्टूडियो ए.आई. असिस्टेड कोडिंग (प्रॉम्प्ट-बेस्ड स्क्रिप्टिंग) ” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में (आर) और आर स्टूडियो डेटा विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण उपकरण बन गए हैं। अब एआई-सहायता प्राप्त कोडिंग और प्रॉम्प्ट-आधारित स्क्रिप्टिंग से सीखना और भी आसान हो गया है। छात्र और शोधकर्ता केवल निर्देश लिखकर जटिल कोड तैयार कर सकते हैं। इससे समय की बचत होती है और त्रुटियाँ कम होती हैं। शिक्षा जगत में यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
द्वितीय सत्र में उन्होंने “रनिंग को-रिलेशन एंड रेग्रेशन इन आर” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि आज के समय में डेटा विज्ञान और सांख्यिकी में आर भाषा का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। कोरिलेशन तकनीक से हम दो वेरिएबल्स के बीच संबंध की ताक़त और दिशा जान सकते हैं। वहीं रेग्रेशन विश्लेषण हमें भविष्यवाणी करने और पैटर्न समझने में मदद करता है। इन विधियों से शिक्षा, शोध और उद्योग जगत में निर्णय लेना अधिक सटीक हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर भाषा डेटा विज्ञान की रीढ़ साबित होगी।
तृतीय सत्र में डॉ. पराग बी. शाह ने “मल्टिपल रिग्रेशन इन आर” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि डेटा विज्ञान और सांख्यिकी में (आर) भाषा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। तकनीक से हम एक साथ कई स्वतंत्र वेरिएबल्स का प्रभाव किसी एक आश्रित वेरिएबल पर देख सकते हैं। यह विधि शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जगत में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाती है। शोधकर्ता इन फ़ंक्शनों का उपयोग करके जटिल डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। इससे भविष्यवाणी करना और पैटर्न समझना आसान हो गया है।
अंतिम सत्र में उन्होंने “कम्पैरिजन ऑफ आउटपुट्स (आर वर्सेस जमोवी)” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में आर और जामोवी दोनों ही लोकप्रिय प्लेटफ़ॉर्म हैं। आर में आउटपुट अधिक तकनीकी और कोड-आधारित होता है, जहाँ उपयोगकर्ता समरी या एल.एम. जैसे फ़ंक्शनों से विस्तृत परिणाम प्राप्त करते हैं। दूसरी ओर, जामोवी एक ग्राफिकल इंटरफ़ेस प्रदान करता है, जिसमें परिणाम तालिकाओं और चार्ट्स के रूप में तुरंत दिखाई देते हैं। आर लचीलापन और गहराई देता है, जबकि जामोवी सरलता और उपयोगकर्ता-मित्रता पर केंद्रित है। शोधकर्ताओं का मानना है कि दोनों प्लेटफ़ॉर्म अपने-अपने उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी हैं और डेटा विज्ञान को अधिक सुलभ बना रहे हैं।
इस छह दिवसीय कार्यक्रम में महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों के 37 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। संकाय सदस्यों सहित केंद्र के सभी अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई तथा सह-संयोजन श्री सी. डी. राणा, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, आईयूसीटीई कर रहे हैं।










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