शोध पद्धतियां अब अधिक सशक्त होगी

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वाराणसी ।अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र (आईयूसीटीई) में “फ्रॉम डेटा टू ‎इनसाइट्स: स्टैटिस्टिकल एनालिसिस विद फ्री एंड एआई-ड्रिवन टूल्स” विषय पर छह दिवसीय शॉर्ट टर्म कार्यक्रम ‎का आयोजन किया जा रहा है। ‎

कार्यशाला के छठे दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई ने “क्वालिटेटिव डाटा ‎एनालिसिस” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि गुणात्मक आँकड़ों का विश्लेषण शिक्षा और सामाजिक ‎विज्ञान में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह पद्धति लोगों के अनुभवों और विचारों को गहराई से समझने में मदद ‎करती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि डेटा एनालिसिस के गुणात्मक तरीकों से नीतियों और योजनाओं को अधिक ‎प्रभावी बनाया जा सकता है। इस अध्ययन से उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में शोध पद्धतियाँ और भी सशक्त होंगी।

द्वितीय सत्र में श्री सी. डी. राणा, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, आईयूसीटीई ने “बिब्लियोमेट्रिक मैपिंग यूज़िंग ‎वोसव्यूअर एंड एडवांस्ड विज़ुअलाइज़ेशन यूज़िंग सिमागो ग्राफ़िका” विषय पर व्याख्यान दिया । उन्होंने बताया कि ‎शोधकर्ताओं ने हाल ही में बिब्लियोमेट्रिक मैपिंग के लिए वोसव्यूअर और उन्नत विज़ुअलाइज़ेशन के लिए सिमागो ‎ग्राफ़िका का उपयोग किया है। यह तकनीक वैज्ञानिक प्रकाशनों और शोध नेटवर्क को बेहतर ढंग से समझने में मदद ‎करती है। उन्होंने बताया कि इन उपकरणों से डेटा विश्लेषण अधिक सटीक और दृश्यात्मक हो गया है। रिपोर्ट में ‎बताया गया है कि इससे शोधकर्ताओं को सहयोग और नवाचार के नए अवसर मिल सकते हैं। आने वाले समय में ‎डिजिटल शोध उपकरण शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। विशिष्ट व्याख्यानों के ‎बाद समापन सत्र का आयोजन किया गया।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय बिहार दक्षिण विश्वविद्यालय, गया के पूर्व प्रति-कुलपति प्रो. ओ.पी. ‎राय की गरिमामयी उपस्थित रही। अपने उद्बोधन में उन्होंने कार्यकुशलता और उत्पादकता को बढ़ाने में ‎आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आलोचनात्मक सोच ‎‎(Critical Thinking) के कौशल को विकसित करने के साथ-साथ एआई के नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर ‎विशेष बल दिया। इसके अतिरिक्त, प्रो. राय ने इस बात का भी उल्लेख किया कि प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली के ‎कई आयाम आधुनिक युग में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं, और उन्होंने शिक्षा में नैतिक मूल्यों के समावेश की ‎आवश्यकता पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. निर्मला होरो (प्रोफेसर, एथलेटिक्स एसोसिएशन, विज्ञान संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय) ने ‎अपने वक्तव्य में बताया कि अधिगम (सीखना) एक आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों ‎को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन (Upgrade) करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने तेजी से ‎बदलते आधुनिक युग में प्रासंगिक बने रहने के लिए नवीन तकनीकों को सीखने की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। ‎अध्यक्षीय उद्बोधन में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आईयूसीटीई (IUCTE) के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने ‎भारत सहित ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के 38 देशों में केंद्र की निरंतर बढ़ती उपस्थिति एवं विस्तार को ‎रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यद्यपि शैक्षणिक डिग्रियां महत्वपूर्ण हैं, तथापि शिक्षा का ‎वास्तविक उद्देश्य मानव का समग्र एवं सर्वांगीण विकास (Holistic Development) सुनिश्चित करना है। इस ‎छःदिवसीय कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुति एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीप्ति गुप्ता ने तथा सत्र संचालन श्री चक्रधर राणा ‎ने किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, ‎उत्तर प्रदेश सहित 10 राज्यों के 37 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। संकाय सदस्यों सहित केंद्र के सभी ‎अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक प्राध्यापक, आईयूसीटीई ‎तथा सह-संयोजन श्री सी. डी. राणा, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, आईयूसीटीई कर रहे हैं।

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