
राजभाषा सप्ताह का समापन और पुरस्कार वितरण
वाराणसी। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा राजभाषा सप्ताह समारोह पुरस्कार वितरण एवं कवि गोष्ठी से समापन हुआ। मूल रूप से हिंदी में अधिकाधिक काम करने वाले कर्मचारी, वाद विवाद प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले जय प्रकाश विश्वकर्मा, एमएल सिंह, संजय मौर्य, पेमा छोदेन, कैलाश नाथ शुक्ल, प्रदीप कुमार, सुधृति विश्वास,दीपांकर, रविशंकर, रमेश चन्द्र, अमित कुमार विश्वकर्मा को कुलपति एवं कुलसचिव ने पुरस्कृत किया गया। नवगीत के प्रमुख स्तंभ डॉ अशोक कुमार सिंह ने “बसती हैं बस्तियां बसते नहीं है लोग उसको शहर कहते हैं “गीत के माध्यम से आधुनिकता की होड़ में लगे शहरों की भौतिक विडंबनाओं का मार्मिक वर्णन किया। अवध से आए युवा कवि रामायण धर द्विवेदी ने ‘मनुज का एक ही निर्णय बदल देता परिस्थितियाँ,
बना देता पितामह भी बना देता शिखण्डी भी,’…सफलता प्रतिदिन की आदतों का उत्पाद है; जीवन में केवल एकबार बदलाव का नहीं आदि कालजयी कविताओं द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया। डॉ प्रकाश उदय, डॉ नसीमा निशा, डॉ शबनम , आर के मिश्र,डॉ महेश शर्मा, डॉ सुशील ने भावपूर्ण गीत एवं गजल प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि निदेशक मानव संसाधन विकास केन्द्र बीएचयू आनंद वर्धन शर्मा ने राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति पर सारगर्भित वक्तव्य दिया। अध्यक्षता करते हुए संस्थान कुलपति प्रो वांगचुक दोरजी नेगी ने कहा कि हिंदी के विकास के लिए सतत सकारात्मक कार्य करना हमारा कर्तव्य है। संस्थान परिवार हिंदी के विकास के लिए अनवरत प्रयासरत है। कविता मानव मात्र को ऊंचे आदर्श, पवित्र धारणा और अटल आस्था को धारण करने की ऊर्जा और शक्ति देती है। कविता के माध्यम से जीवन के सत्य और सब प्रकार के अनुभवों को व्यक्त किया जा सकता है। कविता ही हृदय को मानवीय दुर्गुणों से ऊपर उठाकर लोक-सामान्य भाव-भूमि पर ले जाती है जहाँ अनल विश्व की शाश्वत गतियों के साथ ईश सत्ता के शुद्ध अनुभूतियों का संचार होता है। संचालन साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह, स्वागत डॉ अनुराग त्रिपाठी और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ सुनीता चंद्रा ने किया। इस अवसर पर उप कुलसचिव डॉ हिमांशु पांडेय, सहायक कुलसचिव प्रमोद सिंह, प्रो उमेश चंद्र सिंह, डॉ राम जी सिंह डॉ शुचिता शर्मा, डॉ ए के राय, डॉ नवांग तेन्फेल, डॉ प्रशांत कुमार मौर्य, डॉ रवि रंजन, डॉ पप्पु कुमार ,डॉ कृष्णा पांडेय, रवि गुप्त मौर्य,कुन्संग नामग्याल, राजीव रंजन सिंह ,भगवान पांडेय सर्वजित आदि थे।
