वाराणसी। प्रेमचंद की कहानी “मस्जिद और मंदिर के बीच” हमें सहिष्णुता, संचार, रूढ़िवादिता, सहानुभूति और एकता के बारे में कई नैतिक सबक सिखाती है। कहानी की विशिष्ट घटना के लिए प्रासंगिक हैं, बल्कि अंतरधार्मिक और अंतरसांस्कृतिक संबंधों के व्यापक मुद्दों के लिए भी प्रासंगिक हैं। यह बात मुंशी प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही की ओर से प्रेमचंद स्मारक लमही में आयोजित दैनिक कार्यक्रम सुनों मैं प्रेमचंद के 1082 दिन पूरे होने पर निदेशक राजीव गोंड ने कहा। प्रेमचंद की कहानी मंदिर मस्जिद का पाठ रंगकर्मी विजय बनरवाल ने किया। इस अवसर पर प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, मेवालाल श्रीमाली, राहुल यादव, राम अचल, देव बाबू, सचिन, विनोद कुमार, विकास कुमार, विश्वास त्रिपाठी, मनोज विश्वकर्मा, सुरेश चंद्र दुबे आदि थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *