वाराणसी।”एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के लिए योग”। यह वैश्विक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ एकता और समुदाय की भावना को बढ़ावा देने के लिए योग के महत्व पर जोर देता है।

उक्त विचार कुलपति प्रो.बिहारी लाल शर्मा ने सप्ताहव्यापी योग शिविर के तीसरे दिन प्रशिक्षण एवं योगाभ्यास कर रहे छात्रों से कहा कि भारत के विश्व गुरु बनने का समय आ गया है। योग के मामले में भारत विश्व गुरु है। भारत ने योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और योग के जरिए सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा दिया। यह शरीर को रोगमुक्त रखता है और मन को शांति प्रदान करता है। भारतीय संस्कृति से जुड़ी ये क्रिया अब विदेशों तक फैल चुकी है। हर साल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है और इस दौरान दुनियाभर के लोग सामूहिक रूप से योगाभ्यास करते हैं।

कुलसचिव राकेश कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य योग के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। शरीर स्वस्थ रहता है और रोगों की चपेट में आने से बच जाता है। वहीं अगर कोई रोग से ग्रस्त हैं तो उसके निवारण के लिए भी नियमित योग असरदार होता है।

योग विज्ञान केंद्र के समन्वयक एवं केन्द्राध्यक्ष प्रो.राघवेंद्र जी दुबे ने कहा कियोग एक स्वस्थ और संतुलित जीवन शैली को प्रोत्साहित करता है। ध्यान व योग मानसिक शांति देता है, जिससे सकारात्मक विचार आते हैं और लोग स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

प्रशिक्षक डॉ. राजकुमार मिश्र ने बताया कि शारीरिक निष्क्रियता को कम करना, जो विश्वभर में मृत्यु का एक प्रमुख कारण है तथा हृदय संबंधी बीमारियों, कैंसर और मधुमेह जैसी बीमारियों के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है।

सम्पूर्ण योग एवं प्राणायाम का प्रयोगात्मक संचालन योगी डॉ राजकुमार मिश्र ने किया।

उक्त अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के साथ योग के आराधक बाहर से भी जुड़कर अभ्यास किये।

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