
वाराणसी।आसि निवासी त्रिभुवन नाथ मिश्रा का देहांत 18 जून को सर सुन्दर लाल चिकित्सालय अस्पताल में हो गया।
जानकारी के अनुसार त्रिभुवन नाथ मिश्रा हनुमान जी के परम भक्त थे और लगभग 50 वर्ष से हनुमान जी की नियमित दर्शन पूजन करने के लिए संकट मोचन हनुमान जी मंदिर जाते थे।
17 जून एकादशी के दिन भी वह संकट मोचन मंदिर से दर्शन करके लौट रहे थे और पुरानी गली के पास अत्यधिक गर्मी से वह हीट वेव के शिकार हो गए। किसी अपरिचित व्यक्ति ने उनको काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुंदर लाल चिकित्सालय में भर्ती कराया था जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
उनके पुत्र राम यश मिश्र ने बताया की पिताजी 17 तारीख को मंदिर से निकलने के बाद घर नहीं लौटे तो लंका थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई और खोजबीन किया गया तो 20 जून को सर सुंदर लाल चिकित्सालय में वह मिले।
शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार हरिश्चंद्र घाट पर किया गया ।
उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ख्यातिलब्ध साहित्यकार लोक भूषण सम्मान से सम्मानित डॉक्टर जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि वह हनुमान जी के सच्चे भक्त थे और 50 वर्ष से नियमित हनुमान जी का दर्शन पूजन करने जाते थे और घर में श्री रामचरित मानस का पाठ अनवरत करते रहते थे। वहीं उनके निधन पर अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास एवं संकट मोचन मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ मिश्रा ने कहा कि वह हमारे परिवार के ही सदस्य थे। देवरिया के रोहनिया पिपरा मिश्र के रहने वाले थे और हनुमान जी के सच्चे भक्त थे और उनका जीवन हनुमान जी के लिए ही समर्पित था उनके निधन से हम काफी मर्माहट है वही उनके अंतिम संस्कार में नगर के गणमान्य लोग, वरिष्ठ पत्रकार सहित सैकड़ो लोग शामिल थे।
