
शत कोटि नमन, वंदन अनेक।
हे वेद शिखर, हे प्रवर सन्त।
श्रद्धांजलि, श्रद्धास्पद अर्पित।
लो अंजुलि भरि भरि अश्रु नेह।
शुक्ल यजुर्वेद के शीर्ष विद्वान वेद मूर्ति लक्ष्मीकांत दीक्षित जी का देहावसान हिंदू समाज के लिए अपूर्ण क्षति है। ईश्वर आपको शिव शायुज्य प्रदान करे।
काशी के मीरघाट स्थित आपका निवास था।आपके आचार्यत्व में भारत के अनेक शहरों मे वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
श्री अयोध्या जी में आपके ही दिशा निर्देशन में बहु प्रतीक्षित प्रभु श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा विगत 22 जनवरी 2024 मे हुई थी।काशी का यह सौभाग्य था कि कर्मकाण्ड की वैदिक परम्परा के शिखर एवं उच्चकोटि के विद्वान का सानिध्य प्राप्त था।
वेदसेवा के लिए आप वेद सम्राट, वैदिक भूषण, वेदिक रत्न, देवी अहिल्या बाई राष्ट्रीय पुरस्कार आदि अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों एवं उपाधियों से अलंकृत थे।
आपका महाप्रयाण काशी को रिक्त कर गया।
हम सब वेदानुरागी आपके ऐसे चले जाने से अपार कष्ट में हैं।
प्रभू आपको अपने हृदय में स्थान दे।हम सब की ओर से विनम्र सहस्र कोटि श्रद्धांजलि।
के. वेंकट रमण घनपाठी
ट्रस्टी – श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट
