
वाराणसी।आज हम यहाँ विभाजन विभीषिका दिवस के इस महत्वपूर्ण अवसर पर एकत्रित हुए हैं, एक ऐसा दिन जो हमारे देश के इतिहास के सबसे दर्दनाक और त्रासद अध्याय की याद दिलाता है। 15 अगस्त, 1947 को जब हम स्वतंत्रता का अमृत अनुभव कर रहे थे, उसी समय हमारे देश के करोड़ों लोग विभाजन की आग में जल रहे थे। यह दिन हमें उस भयावह त्रासदी की याद दिलाता है, जिसने न केवल लाखों लोगों की जिंदगियों को बर्बाद किया, बल्कि हमें एक अमूल्य सीख भी दी—विभाजन और हिंसा से कभी कोई समस्या हल नहीं होती, बल्कि वे समाज और देश को और भी कमजोर बना देते हैं।
उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने आज विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर अध्यक्षीय वक्तव्य व्यक्त किया।
बतौर मुख्य वक्ता तुलनात्मक धर्म दर्शन विभागाध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि विभाजन की इस विभीषिका ने हमारे समाज, हमारी संस्कृति, और हमारी एकता को गहरा आघात पहुँचाया। लाखों लोग अपने घरों से बेघर हुए, हजारों निर्दोष लोग मारे गए, और अनेकों परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए। यह केवल एक भौगोलिक
विभाजन नहीं था, बल्कि यह हमारे दिलों और हमारे समाज के ताने-बाने में भी एक गहरा जख्म था, जिसकी टीस आज भी महसूस होती है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक प्रो राघवेन्द्र जी दुबे ने संचालन करते हुए करते हुए स्वागत और अभिनंदन किया।
वैदिक मंगलाचरण,मंच पर आसीन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
उक्त अवसर पर प्रो सुधाकर मिश्र, प्रो हीरक कांत चक्रवर्ती, प्रो अमित कुमार शुक्ल, प्रो विजय कुमार पाण्डेय, डॉ राजकुमार आदि सहभाग किए।
