चंद्रा साहित्य परिषद के काव्यपाठ में कवियों ने देशभक्ति का जोश भरा

रिपोर्ट :–अमित पांडेय 

वाराणसी। चितईपुर इन्दिरा नगर कालोनी स्थित स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) ने काव्यपाठ कर शहीदों को नमन किया।

अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन किया ।पश्चात मां सरस्वती और शहीद भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।

मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों को अंग वस्त्रम् और पुस्तकें देकर सम्मानित किया गया I

मुख्य अतिथि जाने – माने गीतकार एवं शान ए काशी डॉ. महेंद्र नाथ तिवारी ‘अलंकार’ , विशिष्ट अतिथि द्वय श्रीमती माधुरी मिश्रा “मधु” मशहूर गज़लकार और मधुर नवगीत के लिए अपनी पहचान बना चुके डॉ. छोटेलाल मनमीत,, अध्यक्षता सुप्रसिद्ध व्यंगकार भुलक्कड़

बनारसी, तथा संचालन की भूमिका में गीतकार कवि संतोष प्रीत रहे I

इंडियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (आई ए जे )के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कैलाश सिंह विकास, वरिष्ठ पत्रकार और समाज सेवी डॉ. सुभाष चंद्रा के गरिमामयी उपस्थिति में सभी कवियों और कवयत्रियों द्वारा शहीदों पुष्पांजलि एवं नमन करते हुए काव्य गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। काव्यपाठ रात आठ बजे तक चलता रहा I

कवि राम नरेश ‘नरेश’ ने सरस्वती वंदना गाकर माहौल को काव्य मय बना दिया, वहीं डॉ. छोटे लाल मनमीत की सुरीली रचना -जी सको तो जियो इस वतन के लिए I ज़िंदगी को लुटा दो चमन के लिए II ने गर्म जोशी से तालियां बजाने को मजबूर कर दीं I उसके बाद क्रमश: माधुरी मिश्रा की गज़ल-

तिरंगे को न झुकने दूँ बदन में जान है जब तक।

भुलक्कड़ जी की रचना-देखों वीर जवानों अपने देश पे ये इल्जाम न आए।गिरीश पांडेय जी ने देश के प्रति प्रेम पर अपनी रचना प्रस्तुत किया-देश की वे आन हैं जो देश पर कुर्बान हैं, हाथ में जिनके तिरंगा देश की वे शान हैंIIडॉ. सुभाष चंद्रा की रचना-मातृभूमि की आन बान शानके लिए लाखों शहीद हुएI नाथ सोनांचली की कविता-हमारे खून में अब भी उबाल बाकी है, हमें डराया तो जीना हराम कर देंगेI खूब सराही गई Iसाधना शाही की-कितने लाल ने ख़ून बहाया धरा को कर दिए लाल,धरती से अंबर तक जिसने ऊँचा कर दिया भाल।I

राम नरेश “नरेश” की देश भक्ति रचना-जब तक हैं चाँद,सूरज,सितारे – गगन, तब तक करती रहेगी धरा यह नमन II इसके बाद क्रमश:ॠतु दीक्षित -मां मैं लौट के आऊंगा

जब तक बहेगी मां गंगाII महेंद्र अलंकार की गजल -ऐ तिरंगा तू फहरे गगन में , ये हवाएं तेरा साथ देंगी Iदीपक दबंग-मां वर्षों से आस लगाए बैठी है। सोने की चिड़िया कब होगी ताक लगाए बैठी है।।

झरना मुखर्जी-अपने भारत की शान रख लेना, दिल में रामायण पुराण रख लेनाII

काव्य गोष्ठी में आये कवि परम हंस तिवारी, दिनेश चंद्र, सुरेश कुमार अकेला,lअखलाक भारतीय, आलोक सिंह बेताब, डॉ.वत्सला श्रीवास्तव आदि रचनाकारों ने वीर रस और देश भक्ति की रचनाओं से इस गोष्ठी को विशेष गोष्ठी का स्वरूप दे दिया I

मंच संचालक की भूमिका में रहे कवि संतोष प्रीत ने अपने सुंदर संचालन के साथ अपनी गजलें सुनाकर खूब तालियां बटोरी- हम तिरंगे का मान रखते हैं,हम रहें चाहे कहीं दुनिया में,दिल में हिंदुस्तान रखते हैं।।

इनके अलावा बड़ी संख्या में समाज सेवी पत्रकार आनंद सिंह अन्ना, शामिल रहेI

इस अवसर पर के विशिष्ट सेवाओं के लिए और हिंदी के विकास में योगदान के लिए चयनित विद्वत जनों को अंग वस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर चंद्रा हिंदी गौरव सम्मान-2024 से अलंकृत किया गया I

अतिथि कवियों, पत्रकारों, समाज सेवियों, छायाकारों सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष इं. राम नरेश ‘नरेश’ ने कहा कि यह चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) आपका हैI आज “एक शाम शहीदों के नाम* में शहीदों के प्रति काव्यांजलि देकर अपनी साहित्यिक सेवाओं से आपने देश के मस्तक को और ऊंचाई प्रदान किया है, तथा जिससे निश्चित ही राष्ट्र प्रेम अपने देश वासियों में जागेगा I

अतिथि कवियो और आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ अंत में मधुर जलपान के साथ कवि सम्मेलन का समापन हुआ I

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