
वाराणसी।सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन के समक्ष 78 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण कर कुलपति प्रो शर्मा ने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि
आज का दिन भारत के लिए अभूतपूर्व दिन है।हमारे स्वाधीनता संग्राम सेनानियों ने लम्बे संघर्ष के बाद जिस सपने को देखा था उस संकल्प को लेकरके स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष किया उस संघर्ष की परिणति के रूप में 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली। इस आजाद भारत की आनबान और शान का प्रतीक य़ह तिरंगा इस खुले आसमान के नीचे फहराने लगा। आज हम गौरव शाली हैं वर्तमान शासन सत्ता ने एक साँस्कृतिक- राष्ट्रीय जागरण के माध्यम से इस देश की जनता को जगाया।देश की तरुणाई को ललकारा, देश की जवानी को जागृत किया जिससे इस देश की जवानी जागी।
यह तिरंगा साधारण तिरंगा नहीं है,यह हमारी भारत की आत्मा है, हमारी साँस्कृतिक निधि की धरोहर है, यह तिरंगा भारत के चेतना की प्रतीक है,यह तिरंगा भारतीय स्वाधीनता सेनानियों के समर्पण का प्रतीक है।स्वतंत्रता का अर्थ है अपने बनाये हुये विधान के अंदर कार्य करने के हम प्रवृत्त हों, स्व दायित्वों का समर्पित भाव से कार्य करें।यह देश समान्य देश नहीं है जहां छह मौसम, छह ऋतुयें हैं।दुनियां में यह देश पवित्रत नदियों, पवित्र ग्रंथों वाला देश है।यही वह देश है जंहा ऋषि परम्परा है। सौभाग्य हमारा की हम इस देश के नागरिक हैं।
हमारी युवा शक्ति हमारी ताकत है, दुनियां बूढी हों रही यह देश जवान हो रहा है।यह जवान भारत की ताकत को दुनियां भर में अग्रणी स्थान मिल रहा है,हमे प्रथम स्थान पर सुना जाता है.
इस संस्था की भूमिका स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने में अपने आपको आगे पाया गया जिसमे यहां के विद्यार्थियों में चन्द्रशेखर आजाद ने अपने जीवन को समर्पित कर भारत को आजाद कराया।
यह प्राच्यविद्या का केन्द्र दुनियां मे सबसे प्राचीन शिक्षा मन्दिर है,हमारी भूमिका अपनी संस्कृति एवं भारतीयता के के लिए अति महत्वपूर्ण है।यही हमारी देशभक्ति होगी।
यह देश सदैव विश्व बंधुत्व के भाव को लेकर चला है,हम अपने आचरण से सभी को साथ लेकर चलने की भावना के साथ से आगे बढ़े।
कुलपति ने कहा हम ऋषि परम्परा का अनुसरण कर चतुर्वेद महायज्ञ कर दुनियां के पर्यावरण को शुद्ध कर, इससे उठने वाले धूम से वातावरण को शुद्ध करने का संकल्प पूर्ण कर रहे हैं।
कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि
वर्तमान शासन सत्ता के बदौलत ही आज हमारे सामने 500 साल के संघर्ष के बाद देश का पुनर्जागरण हुआ जिसका जीता जागता उदाहरण आज की आजादी है।हमे अपना-अपना मूल्यांकन करने की जरूरत है. काशी ज्ञान की राजधानी है ज्ञान के प्रवाह को निकालने वाली धारा यह अति प्राचीन संस्था संस्कृत विश्वविद्यालय है।234 वर्षो से अनवरत यह दिव्य प्रकल्प विश्वविद्यालय के रूप में प्रस्फुटित होकर देववाणी का प्रसार देशभर में कर रहा है।जो कि काशी में यह अति प्राचीन है. यह ज्ञान की ज्योति जागते हुये काशी ही नहीं अपितु सम्पूर्ण राष्ट्र को ज्ञान का पान करा रही है।
सभी अध्यापकों और कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि हम जहाँ भी हैं यदि अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठापूर्वक करते हैं तो हम देशभक्त हैं।जो व्यक्ति जहां भी है वह अपने कर्तव्यों का सुचारू रूप से पालन करें वही राष्ट्र भक्ति है हम अपने परिसर को स्वच्छ रखें, अध्ययन- अध्यापन की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखें तथा कार्यालयीय कार्यों को शुचिता और पारदर्शिता के साथ समय पर संपादित करें तो यही राष्ट्र भक्ति है।
प्रारम्भ में विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक मुख्य भवन के समक्ष कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने एनसीसी छात्रों की परेड का निरीक्षण, भारत माता की चित्र एवं गांधी जी, नेहरू जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण करके
ध्वजारोहण के साथ सामूहिक राष्ट्र गान किया गया।
संगीत विभाग के द्वारा कुलगीत एवं ध्वज वंदना किया गया।
परिसर स्थित माँ सरस्वती देवी, डॉ सम्पूर्णानंद जी एवं पंडित चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर नमन किया गया।
राष्ट्रगान के साथ समारोह समापन हुआ।
कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो रामपूजन पाण्डेय, सुधाकर मिश्र, प्रो हरिशंकर पाण्डेय, प्रो हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो जितेन्द्र कुमार,प्रो रजनीश कुमार शुक्ल,डॉ पद्माकर मिश्र, प्रो हीरक कांत चक्रवर्ती, शैलेश कुमार मिश्र,प्रो रमेश प्रसाद, प्रो राजनाथ,प्रो अमित कुमार शुक्ल, प्रो विजय कुमार पाण्डेय, प्रो दिनेश कुमार गर्ग सहित संस्था के अन्य अध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने सहभाग किया।
