
विधानपरिषद सदस्य धमेंद्र राय को निदेशक ने किया सम्मानित

31कविगण हुए सम्मानित

वाराणसी। विश्व हिंदी शोध- संवर्धन अकादमी के तत्वावधान में कविताम्बरा पत्रिका के 45 स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में डा के के प्रजापति विशेषांक (कविताम्बरा) का भव्य लोकार्पण सुंदरपुर वाराणसी स्थित एक होटल के सभागार में धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। स्वागत भाषण में मधुकर मिश्र ने कहा कि डॉ के. के प्रजापति राउरकेला की ग़ज़लें लोक जीवन से जुड़ी हैं। इनकी गज़लों में युग की धड़कन और साधारण जन की पीड़ा मिलती है। भारतीय संस्कृति और परंपरा की अभिव्यक्ति है । लोकमंगल की कामना और मानवी मूल्यों को बचाए रखने का संकल्प है। इन गज़लों में भाव संपदा के साथ आस्था, विश्वास और संघर्ष की गतिशीलता है। यह मूलत: आशावादी और सौंदर्य के कवि है।
मुख्य अतिथि प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि डा कृष्ण कुमार प्रजापति अच्छी सोच के बेहतरीन गजलकार है उनकी गजलों में वंचित मनुष्य के दर्द को वाणी मिली है। वे हमारे समय की गहन पड़ताल करते हैं और हर गलत कार्य का रचनात्मक प्रतिरोध करते हैं। कविताम्बरा के इस अंक से उनकी गजलों को समझने में मदद मिलेगी।
रायपुर से आए डॉ. गिरीश पंकज ने कहा कि डा. कुमार ने शायरी के मर्म और उसके धर्म का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन किया है। गज़ल को नए तेवरों में नया लिबास दिया है।
डॉ. चन्द्रभाल सुकुमार ने गज़लों पर विस्तार से प्रकाश डाला। जमशेदपुर से आए अजय प्रजापति ने डॉ. कुमार की गज़लों को भोगे हुए यथार्थ की अभिव्यक्ति बताया।
पटना से आए डॉ दशरथ प्रजापति ने कहा कि डा कुमार की गज़लों में स्पष्ट कहन शैली के बीच व्यंग्य का प्रयोग एक विशिष्ट सौंदर्य की सृष्टि करता है। डॉ संजय पंकज ने कहा कि डा के के प्रजापति कबीर की परंपरा के कवि हैं।
कवि भोलानाथ त्रिपाठी विव्हल ने कहा कि अहिंदी भाषी क्षेत्र से होकर भी डॉ कुमार ने हिंदी में जो पहचान बनाई है वह अप्रतिम है।
डॉ राघवेंद्र नारायण सिंह, केशव जालान ‘भाईजी’ गिरीश पाण्डेय, श्रीनारायण खेमका, अनिरूद्ध सिन्हा, जय चक्रवर्ती, कंचन सिंह परिहार डॉ. अशोक सिंह आदि ने भी अपने विचार रखें।
अध्यक्षता धर्मसम्राट डा दयानिधि मिश्र और संचालन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने किया।
डॉ के के प्रजापति ने अपनी हिंदी साहित्यिक यात्रा पर विस्तृत प्रकाश डाला।
समारोह में विभिन्न प्रांतो से आए हुए 31 प्रसिद्ध कवियों एवं समाज सेवियों को सम्मानित किया गया। कवियों ने अपने काव्यपाठ से श्रोताओं को मुग्ध कर दिया राणा दीपक सिंह, अनूप अग्रवाल, टीकाराम आचार्य, मणि वेन द्विवेदी, डॉ सुभाष चन्द्र, डॉ नसीमा निशा डॉ. शरद श्रीवास्तव, संतोष प्रीत, सिद्धनाथ शर्मा आदि शताधिक कवियों की उपस्थिति प्रमुख रूप से रही।
