वाराणसी।भारतीय संस्कृति के गौरव को बढ़ाने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे देश की महिलाएं न केवल परिवार और समाज में महत्वपूर्ण योगदान करती हैं, बल्कि वे राष्ट्र के गौरव में भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।भारतीय इतिहास में कई ऐसी महिलाएं हुईं हैं जिन्होंने अपने ज्ञान, साहस और नेतृत्व क्षमता से देश की सेवा की है। इनमें से माता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन और कार्य वास्तव में प्रेरणादायक हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं माता अहिल्याबाई होल्कर ने अपने जीवनकाल में समाज सेवा के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने गरीबों और असहाय लोगों की मदद के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए।

उक्त विचार सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने रविवार को पाणिनी भवन सभागार में माता अहिल्याबाई होल्कर की त्रिशती जयंती समारोह में बतौर अध्यक्षीय उद्बोधन व्यक्त किया।

कुलपति प्रो शर्मा जी ने कहा कि माता अहिल्याबाई होल्कर ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई विद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना की और शिक्षा के प्रसार के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ• महेन्द्र कुमार ने कहा कि माता अहिल्याबाई होल्कर ने सांस्कृतिक विकास के लिए भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए।उन्होंने कई मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों की स्थापना की।भारतीय संस्कृति और भारतीयता का प्रयोग स्व परिवार की भावना से कार्य करने में निहित है। यह भावना हमें अपने परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदार और समर्पित बनाती है। जब हम स्व परिवार की भावना से कार्य करते हैं, तो हम अपने कार्यों में निष्ठा, समर्पण और सेवा भाव को शामिल करते हैं।भारतीय संस्कृति में परिवार का महत्व बहुत अधिक है।

आर्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो रचना दूबे ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि माता अहिल्याबाई ने महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।उनका जीवन संघर्षपूर्ण था।किसी भी महिला के आगे बढ़ने मे पुरुषों का सहयोग रहता है तभी होता है।वे शिव भक्त करते हुए सम्पूर्ण जीवन सादगी के साथ व्यतित किया।मन्दिरों के आक्रमण होने पर यहां बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर का भी जीर्णोद्धार कराया।सती प्रथा के लिये भी लड़ाई लड़ी।उन्होंने हिन्दूओं की रक्षा किया।

सारस्वत अतिथि बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ अरविन्द पाठक ने कहा कि माता अहिल्याबाई ने धर्म, संस्कृति एवं संस्कारों की रक्षा कर स्थापित किया।महिलाओं के खिलाफ प्रचलित कुप्रथाओं को दूर किया।उनका जीवन समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए महत्त्वपूर्ण है।

संयोजक एवं विषय प्रवर्तन

संस्कृत विद्या विभाग के आचार्य रविशंकर पाण्डेय ने सम्पूर्ण कार्यक्रम के विषय पर प्रकाश डाला।

पुण्य श्लोक, दीप प्रज्वलन एवं माता अहिल्याबाई होल्कर के चित्र तथा माँ सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।सरस्वती वंदना।

अहिल्याबाई होल्कर स्मृति सम्मान के लिए चयनित वाराणसी के विभिन्न शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

उक्त अवसर पर प्रो शैलेश कुमार मिश्र, प्रो हीरक कान्ति चक्रवर्ती, प्रो रमेश प्रसाद, प्रो महेंद्र पाण्डेय, डॉ सुरेश उपाध्याय सहित अनेकों लोग उपस्थित थे।

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